मां की दवा लेने जा रहे सगे भाइयों की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत
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लखनऊ के पारा के बुद्धेश्वर के पास शुक्रवार सुबह मां की दवा लेने सीतापुर बाइक से जा रहे दो भाइयों को बेकाबू वाहन ने ठोकर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए।
पुलिस एंबुलेंस से दोनों को ट्रॉमा ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जानकारी पर पहुंचे पिता बेटों का शव देखकर रोने-पीटने लगे। पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। हादसे के वक्त बाइक सवारों ने हेलमेट नहीं लगा रखा था।
पुलिस के मुताबिक, पीजीआई एल्डिको उद्यान सेक्टर थर्ड निवासी वकील श्याम मिश्रा का बड़ा बेटे सुशांत मिश्रा (23) दिल्ली में निजी कंपनी में टेली कॉलर था। जबकि सत्यार्थ (16) एसकेडी स्कूल में नवीं का छात्र था। वकील की पत्नी श्रुति पीजीआई में नर्स हैं। श्रुति करीब तीन साल से गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं।
सीसीटीवी के आधार पर जांच कर रही पुलिस
शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे दोनों बेटे बाइक से सीतापुर में वैद्य के पास दवा लेने जा रहे थे। बुद्धेश्वर के पास बेकाबू वाहन की ठोकर से दोनों भाई गंभीर रूप से जख्मी हो गए। पुलिस दोनों को ट्रॉमा ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गाड़ी नंबर की तलाश में जुटी है।
मां ऑन बेड और पिता कैंसर से हैं पीड़ित
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि श्रुति तीन साल से बिस्तर पर हैं। जबकि डेढ़ साल पहले पति श्याम को भी कैंसर हो गया। छोटा बेटा सत्यार्थ मां-पिता का ख्याल रखता था।
पिता रोते हुए बोले, सब खत्म हो गया
मां की दवा लेने निकले सगे भाइयों का हाल लेने के लिए पिता ने सुबह करीब साढ़े आठ बजे सुशांत के नंबर पर कॉल की। एक राहगीर ने फोन उठाकर दोनों के हादसे में जख्मी होने की बात कही। यह सुनकर पिता श्याम के हाथ से फोन छूट गया। वह रोते बिलखते ट्रॉमा पहुंचे तो देखा स्ट्रैचर पर दोनों बेटों के शव पड़े थे। यह देख वे गश खाकर गिर गए। मोहल्ले के लोगों ने उन्हें संभाला।
बाइक का शौकीन था सुशांत
लोगों ने बताया कि सुशांत बाइक का शौकीन था। वह दिल्ली से हफ्ते भर पहले ही बाइक लेकर घर आया था। इसे लेकर पिता ने उसे कई दफा टोका भी लेकिन वह नहीं माना।
कुर्सी पर बैठ बेटों की लाश निहारती रही मां
पोस्टमार्टम के बाद दोपहर में दोनों बेटों के शव घर पहुंचे तो पूरा मोहल्ला उमड़ पड़ा। रिश्तेदारों ने दोनों बेटों के अंतिम दर्शन कराने के लिए श्रुति को कुर्सी पर बैठाया। वे काफी देर तक बेटों के शव को निहारती रहीं।
वहीं, बेटों की अर्थी को कंधा देते हुए पिता बोले कि दुनिया का इससे बड़ा दुख कोई दूसरा नहीं।