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Lucknow News: मनरेगा घोटाला मामले में दो आरोपी कोर्ट में तलब
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मनरेगा घोटाला मामले में दो आरोपी कोर्ट में तलब
लखनऊ। वर्ष 2007 से 2010 के बीच पद का दुरुपयोग कर मनरेगा में घोटाला मामले में ईडी ने ईडी के विशेष न्यायाधीश की कोर्ट में तत्कालीन परियोजना निदेशक भगवती प्रसाद वर्मा और अतहर परवेज के खिलाफ परिवाद दायर किया है। कोर्ट ने इस परिवाद पर नौ सितंबर को संज्ञान लेकर आरोपियों को तलब किया है।
ईडी की ओर से परिवाद दायर कर बताया गया कि सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। इसी आधार पर ईडी ने जांच की। बताया कि मामला 2007 से 2010 के दौरान प्रदेश के सात जिलों बलरामपुर, गोंडा, महोबा, सोनभद्र, संतकबीर नगर, मिर्जापुर और कुशीनगर में आधिकारिक पद के दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और मनरेगा फंड के दुरुपयोग से संबंधित है।
ईडी की जांच में पता चला कि डीआरडीए के तत्कालीन परियोजना निदेशक और मनरेगा के तत्कालीन अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक भगवती प्रसाद वर्मा और अतहर परवेज ने दूसरे अधिकारियों और निजी आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलीभगत कर घोटाला किया। कहा गया कि आरोपियों ने लखनऊ में चिनहट के संयुक्त समिति पंचायत उद्योग और झंझरी गोंडा के पंचायत उद्योग जैसी फर्मों से अत्यधिक दरों पर जॉब कार्ड, शिकायत पेटी, रजिस्टर, जनरेटर, टेंट, प्राथमिक चिकित्सा किट, पानी की टंकियां, साइनबोर्ड और मुद्रण सामग्री की खरीद की। इससे सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान हुआ।
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जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने इस घोटाले से कई संपत्तियां बनाईं। इसके बाद ईडी ने आरोपियों की लखीमपुर और कानपुर स्थित 97.18 लाख रुपये मूल्य की नौ अचल संपत्तियों को कुर्क किया।
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ईडी की ओर से परिवाद दायर कर बताया गया कि सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। इसी आधार पर ईडी ने जांच की। बताया कि मामला 2007 से 2010 के दौरान प्रदेश के सात जिलों बलरामपुर, गोंडा, महोबा, सोनभद्र, संतकबीर नगर, मिर्जापुर और कुशीनगर में आधिकारिक पद के दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और मनरेगा फंड के दुरुपयोग से संबंधित है।
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ईडी की जांच में पता चला कि डीआरडीए के तत्कालीन परियोजना निदेशक और मनरेगा के तत्कालीन अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक भगवती प्रसाद वर्मा और अतहर परवेज ने दूसरे अधिकारियों और निजी आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलीभगत कर घोटाला किया। कहा गया कि आरोपियों ने लखनऊ में चिनहट के संयुक्त समिति पंचायत उद्योग और झंझरी गोंडा के पंचायत उद्योग जैसी फर्मों से अत्यधिक दरों पर जॉब कार्ड, शिकायत पेटी, रजिस्टर, जनरेटर, टेंट, प्राथमिक चिकित्सा किट, पानी की टंकियां, साइनबोर्ड और मुद्रण सामग्री की खरीद की। इससे सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान हुआ।
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जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने इस घोटाले से कई संपत्तियां बनाईं। इसके बाद ईडी ने आरोपियों की लखीमपुर और कानपुर स्थित 97.18 लाख रुपये मूल्य की नौ अचल संपत्तियों को कुर्क किया।