टीबी की जांच रिपोर्ट मिलेगी सिर्फ दो घंटे में
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टीबी की बीमारी जानलेवा नहीं है। समय पर इलाज शुरू हो और थोड़ी सी सावधानी बरतें तो इससे बचा जा सकता है। टीबी मरीजों की बेहतर सुविधा और जांच के लिए प्रदेश में जीन एक्सपर्ट मशीन लगाई जा रहीं हैं।
टीबी की बीमारी सबसे अधिक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की मलिन बस्तियों में फैल रही है। यह विचार मंगलवार को गोमतीनगर स्थित पर्यटन भवन के सभागार में विश्व क्षय रोग दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल ने व्यक्त किए।
टीबी रोग से पीड़ित मरीजों को बेहतर जांच की सुविधा देने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आठ नई जीन एक्सपर्ट लगेंगी। 38 जिलों में ये मशीन पहले से ही लग चुकी हैं।
तुंरत इलाज से बचेगी मरीजों की जान
इस मशीन की मदद से मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस टीबी से ग्रसित मरीजों की जांच रिपोर्ट दो घंटे के भीतर मिल सकती है और तुरंत इलाज शुरू कर उनकी जान बचाई जा सकती है।
इस मौके पर प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरविंद कुमार ने कहा कि प्रदेश में टीबी के मरीजों की संख्या तेजी से कम हो रही है। जो मरीज बीच में दवा लेना बंद कर रहे हैं उनसे थोड़ी सी स्थिति खराब हो रही है।
स्टेट टीबी ऑफिसर डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस टीबी से ग्रसित मरीजों को बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश के आठ शहरों गाजियाबाद, मुरादाबाद, कन्नौज, मेरठ, आजमगढ़, अंबेडकरनगर, बरेली और लखीमपुर में मल्टीपल ड्रग रेसिस्टेंस टीबी सेंटर खोले जाएंगे। इन सेंटरों पर उन मरीजों को भर्ती कर इलाज करने की सुविधा होगी जो टीबी के रोगी है इलाज के बीच में छोड़ देते हैं।