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ये है NTPC हादसे का सच: सेफ्टी वॉल्व चोक था, फिर भी नहीं बंद किया प्लांट

Fri, 03 Nov 2017 02:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 03 Nov 2017 02:54 AM IST
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truth behind explosion in NTPC.
एनटीपीसी प्लांट - फोटो : amar ujala

ऊंचाहार से अजीत बिसारिया की रिपोर्ट

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नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) की जिस छठी यूनिट में बुधवार को भीषण हादसा हुआ उसके बॉयलर के सेफ्टी वॉल्व सोमवार से ही ठीक से काम नहीं कर रहे थे। इसको लेकर टेक्नीशियनों ने आगाह भी किया था। पर, एनटीपीसी के आला अफसरों ने उन चेतावनियों को दरकिनार कर दिया। इस घोर लापरवाही से हादसा हुआ। बृहस्पतिवार को मौतों का आंकड़ा 30 तक पहुंच गया। गंभीर रूप से झुलसे एजीएम संजीव शर्मा की भी लखनऊ के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई।

हादसे के कारणों का पता लगाने को हम एनटीपीसी पहुंचे तो गेट पर ही हमारी मुलाकात एक टेक्नीशियन से होती है। ये टेक्नीशियन हादसे के वक्त प्लांट में ही मौजूद थे। नाम न छापने की शर्त पर वे बताते हैं कि जांच में सोमवार को ही पता चल गया था कि सेफ्टी वॉल्व चोक हो चुके हैं। सेफ्टी वॉल्व का चोक होना साफ इशारा है कि किसी भी क्षण कोई बड़ा हादसा हो सकता है। फिर भी प्लांट को चालू रखा गया। बेहद गुस्से में वे कहते हैं, यूनिट नंबर-6 का अलार्म सिस्टम तक दुरुस्त नहीं किया गया था। 5-7 मिनट पहले भी खतरे की घंटी बज गई होती तो शायद कुछ जानें बच गई होतीं।
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एनटीपीसी हादसे में जारी है मौतों का सिलसिला, अब तक 30 की जान गई, पढ़ें-पूरी खबर
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देखें तस्वीरें- NTPC हादसा: बॉयलर फटा और हर तरफ बिखर गई लाशें, मची चीख-पुकार

लोहे के एंगल गल कर गिरने लगे...अंदाजा लगाइए हालात कैसे रहे होंगे
यह टेक्नीशियन बताते हैं जब बॉयलर फटा तो लोहे के मोटे-मोटे एंगल गलकर गिरने लगे। वे कहते हैं, आप खुद अंदाजा लगाइए कि चपेट में आने वालों का हश्र कैसा रहा होगा। जो कामगार सेफ्टी बेल्ट पहनकर काम कर रहे थे, उन्हें बेल्ट खोलने तक का वक्त नहीं मिला।

5 मिनट पहले खतरे का संकेत मिलते ही भाग खड़े हुए अफसर

truth behind explosion in NTPC.

हादसे के समय जान बचाकर बाहर निकलने में कामयाब रहे एक इंजीनियर दावा करते हैं कि हादसे से करीब पांच मिनट पहले मशीनों ने खतरे का संकेत दिया था। संकेत मिलते ही अफसर भाग खड़े हुए। वे कहते हैं कि घोर लापरवाही हुई। आग लगने की स्थिति में फायर सर्विस तक की कोई व्यवस्था नहीं थी।

पांच को एयरएंबुलेंस से दिल्ली भेजा
लखनऊ लाए गए झुलसे 46 लोगों में से पांच को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया। इनमें एजीएम मिश्रीराम, एजीएम प्रभात श्रीवास्तव, श्रमिक सहदेव साहू, घनबोई और छोटू चौधरी शामिल हैं।

मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश, मानवाधिकार आयोग ने भी दिया नोटिस
प्रदेश सरकार ने उंचाहार स्थित एनटीपीसी में हुए हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच केनिर्देश दिए हैं। वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हादसे में मौतों पर यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने कहा कि लापरवाही के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच जरूरी है।

मृतक आश्रितों को एनटीपीसी 20 लाख तो केंद्र देगा 2 लाख की मदद

truth behind explosion in NTPC.

एनटीपीसी हादसे में मरने वालों के परिवारीजनों को 20-20 लाख, गंभीर घायलों को 10 लाख और मामूली रूप से घायलों को दो लाख रुपये की मदद देगी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मृतक आश्रितों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार की मदद का एलान किया है। राज्य सरकार ने बुधवार को ही मृतक आश्रितों को 2 लाख, गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार और घायलों को 25 हजार रुपये की मदद की घोषणा की थी।

एनटीपीसी ने कहा- पहली नजर में हादसे की वजह राख निकलने में बाधा
मामले पर उत्तरी क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक रवींद्र सिंह राठी का कहना है कि पहली नजर में हादसे की वजह भट्ठी के तलहटी से राख निकलने में बाधा आना रही है। इससे बॉयलर व टरबाइन का प्रेशर बढ़ा और यूनिट ट्रिप हो गई। इसी दौरान 20 मीटर ऊपर फर्नेस के बाहरी तरफ इकोनामाइजर हॉपर  खुल गया और गरम राख और स्टीम की चपेट में आने से 29 लोगों की मौत हो गई। जांच के लिए निदेशक एसके रॉय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी एक माह में अपनी रिपोर्ट देगी।

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