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Lucknow News: वसूली व कर्ज से परेशान चाट विक्रेता ने दी जान
Wed, 08 Jul 2026 02:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Wed, 08 Jul 2026 02:38 AM IST
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अजय गुप्ता की फाइल फोटो।
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लखनऊ। वसूली और कर्ज से परेशान नाका फतेहगंज निवासी चाट विक्रेता अजय गुप्ता (40) ने मंगलवार दोपहर घर में फंदा लगा लिया। परिजनों ने थाने में कोई लिखित शिकायत नहीं की है।
अजय के भतीजे साहिल ने बताया कि चाचा अमीनाबाद में बताशे का ठेला लगाते थे। फड़ संचालक उनसे रोज 300 से 400 रुपये वसूलता था। रुपये न देने पर पिटाई भी करता था। चाचा ने घर की जरूरतों के लिए सूदखोरों से 30 से 40 हजार रुपये उधार लिए थे। सूदखोर उनसे रोज 150 से 200 रुपये वसूलते थे। उनकी कमाई 700 से 800 रुपये थी। दुकान लगाने और सूद के रुपये देने के बाद उनके पास कुछ नहीं बचता था। इससे वह बहुत परेशान थे। उनकी पत्नी अनीता ने जेवर बेचकर कुछ कर्ज चुकाया था, फिर भी सूदखोर ब्याज के नाम पर वसूली करते रहे। मंगलवार सुबह वसूली करने वालों और सूदखोरों से विवाद के बाद अजय बिना दुकान लगाए घर लौट आए। उस वक्त पत्नी अनीता दूसरों के घर काम करने और बेटा आदर्श ट्यूशन पढ़ने गया था। अनीता घर लौटीं तो उन्होंने अजय को फंदे से लटका पाया। इंस्पेक्टर नाका विवेक चौधरी ने बताया कि रुपये के लेनदेन और कर्ज की बात सामने आई है, लेकिन तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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अजय के भतीजे साहिल ने बताया कि चाचा अमीनाबाद में बताशे का ठेला लगाते थे। फड़ संचालक उनसे रोज 300 से 400 रुपये वसूलता था। रुपये न देने पर पिटाई भी करता था। चाचा ने घर की जरूरतों के लिए सूदखोरों से 30 से 40 हजार रुपये उधार लिए थे। सूदखोर उनसे रोज 150 से 200 रुपये वसूलते थे। उनकी कमाई 700 से 800 रुपये थी। दुकान लगाने और सूद के रुपये देने के बाद उनके पास कुछ नहीं बचता था। इससे वह बहुत परेशान थे। उनकी पत्नी अनीता ने जेवर बेचकर कुछ कर्ज चुकाया था, फिर भी सूदखोर ब्याज के नाम पर वसूली करते रहे। मंगलवार सुबह वसूली करने वालों और सूदखोरों से विवाद के बाद अजय बिना दुकान लगाए घर लौट आए। उस वक्त पत्नी अनीता दूसरों के घर काम करने और बेटा आदर्श ट्यूशन पढ़ने गया था। अनीता घर लौटीं तो उन्होंने अजय को फंदे से लटका पाया। इंस्पेक्टर नाका विवेक चौधरी ने बताया कि रुपये के लेनदेन और कर्ज की बात सामने आई है, लेकिन तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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