एक साथ पैदा हुए तीन बच्चे, बेटे की चाह में हो गई पांच बेटियां
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काश! बेटे की जिद न करता! लगातार तीन बेटियां हुईं तो मान लिया कि ऊपर वाला बेटा नहीं देना चाहता है। चौथी बेटी हुई तो नसबंदी कराने की सोची। बड़ों की सलाह पर मुकर गया।
अब भगवान ने दो बेटों के साथ एक बेटी भी दे दी। मैं मजदूर इन्हें कैसे पालूंगा। सात बच्चों का बोझ कैसे उठाउंगा। यह कहना है कि जच्चा बच्चा अस्पताल में एक साथ हुए तीन बच्चों के पिता कानपुर देहात के रूरा सरगांव बुजुर्ग निवासी दिनेश चंद्र का।
यहां भर्ती उनकी पत्नी शैल कुमारी ने शुक्रवार को तीन बच्चों को जन्म दिया। जिसमें दो बेटे और एक बेटी है। दंपति के पहले से ही चार बेटियां पारुल (10), पायल (8), अर्चना (5) और पलक (3) हैं।
छुड़वा दी बेटियों की पढ़ाई
दो साल पहले दिनेश चंद्र को नरेगा में आखिरी बार मजदूरी मिली थी। तब से वह बाजार में मजदूरी कर रहा है। बीपीएल कार्डधारक परिवार के पास न तो रहने का ठिकाना है और न ही खेती। निराला नगर में एक छोटे से बिना बिजली वाले कमरे में दंपति सात बच्चों के साथ रहेगा।
दिनेश ने पहली और दूसरी बेटी को कुछ दिनों तक स्कूल भेजा लेकिन जब तीसरी बेटी पैदा हुई तो दोनों बेटियों का स्कूल जाना बंद हो गया।
इसके बाद से कोई भी बेटी स्कूल नहीं गई। दिनेश कहता है कि सरकारी मदद मिलेगी तो वह बेटियों को जरूर पढ़ाएगा। दिनेश ने बताया कि अल्ट्रासाउंड में सिर्फ दो बच्चे होने की रिपोर्ट आई थी लेकिन तीन बच्चे हो गए।