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प्रकृति और आस्था का संगम है यहां
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 04 Sep 2013 12:20 PM IST
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चितौरा झील, जंगली नाथ मंदिर, बहराइच
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बहराइच गोंडा रोड से यह स्थान 8 किमी की दूरी पर है जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से खिंचे चले आते हैं। चितौरा झील से एक छोटी नदी टेरी नदी निकलती है। यह एक ऐतिहासिक जगह भी मानी जाती है।
ऐसी मान्यता है कि चितौरा झील के निकट ही महाराज जनक के गुरू अष्टवक्र मुनि रहते थे और इसी जगह महाराजा सुहेलदेव और सैयद मसूद गाजी के बीच जमकर लड़ाई हुई थी जिसमें सुहेलदेव की जीत हुई थी।
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इस वजह से ही यहां हर साल बसंत पंचमी पर एक मेले का आयोजन होता है। वैसे यहां अगस्त से लेकर अक्टूबर के बीच कई प्रवासी पंछियां आते हैं जिससे इस झील की खूबसूरती और महत्ता दोनों ही बढ़ जाती है।
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कैलाशपुरी बैराज
इस झील को देखने के बाद आप चाहें तो कैलाशपुरी बैराज की ओर रुख कर सकते हैं। लखीमपुर-बहराइज बॉर्डर पर बने इस बैराज की दूरी बिछिया स्टेशन से सिर्फ 7 किमी है। घाघरा नदी पर बना यह बैराज बेहद खूबसूरत नजारा पेश करता है।
जंगली नाथ मंदिर
यह भगवान शिव के पुराने मंदिरों में गिना जाता है। यह इटावा रोड के निकट गंधर्व झील से लगभग 6 किमी दूर है।
हालांकि यहां बहुत कम लोग जाते हैं लेकिन अगर आपको दूसरी जातियों की मान्यताओं और रहन-सहन से वाकिफ होना अच्छा लगता है तो इस पवित्र जगह एक बार जरूर घूम आइए।
यहां आपको थारू जाति को करीब से देखने-समझने का न सिर्फ मौका मिलेगा बल्कि आप यहां जी भरकर मस्ती भी कर सकते हैं।