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मुजफ्फरगर: दंगों के बाद अब करोड़ों का घोटाला
नरेश शर्मा/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 31 Jan 2014 09:19 AM IST
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उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में बसों की चेकर्ड प्लेट खरीद में घपले के बाद अब सहारनपुर क्षेत्र के मुजफ्फरनगर डिपो में नया मामला सामने आया है।
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35 अनुबंधित बसों को हर महीने फर्जी तरीके से 1000 से 2000 किमी की दूरी का भुगतान करने का मामला सामने आया है। अधिकारियों का मानना है कि अनुबंधित बस मालिक करोड़ों रुपये डकार चुके हैं।
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इस खुलासे के बाद क्षेत्रीय प्रबंधक का हटा दिया गया है। वहीं मुख्यालय से एक टीम घपले की जांच करने मुजफ्फरनगर जा रही है।
निगम सूत्रों के अनुसार गोपनीय शिकायत पर आईटी कंपनी ट्राईमेक्स के सहयोग से 9 बसों को बीते छह माह से फर्जी तरीके से औसतन 17 रुपये प्रति किमी के रेट से 1000-2000 किमी की एंट्री करके भुगतान किए जाने का खुलासा हुआ है।
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सूत्रों की मानें तो 7-8 बस मालिक परिवहन अफसरों, लिपिकों एवं कंडक्टरों की साठगांठ से पिछले तीन साल से फर्जी तरीके से 35 अनुबंधित बसों का भुगतान ले रहे थे।
ये बस मालिक मेरठ एवं आसपास के जिलों के हैं। मुजफ्फरनगर डिपो से 67 अनुबंधित बसों का संचालन बिजनौर, मेरठ, पानीपत एवं बड़ौत के बीच होता है।
10 जनवरी को इसको लेकर रिकवरी वाले अनुबंधित बस मालिकों ने क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय पर बवाल किया। तब कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक शरद सिंह ने दिखाने के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी।
मुजफ्फरनगर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक नरेश पाल सिंह ने तीन बार जांच करने पहुंची समिति को जरूरी कागजात और कंप्यूटर आदि मुहैया नहीं कराए।
इस लापरवाही के लिए कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक शरद सिंह को हटा दिया गया, लेकिन सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक नरेश पाल डिपो में कुंडली मारे बैठा है।
प्रबंध निदेशक ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को मुख्यालय में तैनात प्रधान प्रबंधक एसके शर्मा को तत्काल टीम सहित पहुंचकर जांच करने का निर्देश दिया है।
रेंडम जांच के निर्देश
प्रबंध निदेशक ने मुजफ्फरनगर में फर्जी भुगतान का घपला उजागर होने के बाद लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर, आगरा सहित प्रदेश भर में अनुबंधित बसों के भुगतान की रेंडम जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे लगाई चपत
मुजफ्फरनगर से बिजनौर की दूरी 60 किमी है। एक अनुबंधित बस आने-जाने के छह चक्कर लगाती है। बस मालिकों ने चार चक्कर में ठूंस-ठूंस कर छह चक्कर की सवारियां ढो डालीं जो अन्य बसें छह चक्कर में ढोती थीं।
साठगांठ से एक बस के दो बार बिना आवागमन के महीने भर में 1000 से 2000 किमी दर्ज करके उसका भुगतान कर दिया गया।
बस मालिक ने खोली पोल
मुजफ्फरनगर के एक बस मालिक की बस जब तय लोड फैक्टर पूरा नहीं सकी तो उसके भुगतान से रिकवरी होने लगी, जबकि इस मालिक की बस सुबह से रात तक मुजफ्फरनगर और बिजनौर के बीच छह चक्कर लगाती थी। बस मालिक ने इसकी शिकायत क्षेत्रीय प्रबंधक से की, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।