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Lucknow News: मूल आरसी के लिए भटक रहे 80 हजार आवेदक, अफसर टरका रहे
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परिवहन विभाग का मामला
फेसलेस सेवाओं की खामियों को नजरअंदाज कर रहे एटीसी, आईटी
लखनऊ। दीपक वर्मा लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं। उन्होंने सेकेंड हैंड कार यूपी-31 सीएन 0561 खरीदी। फेसलेस सेवा के तहत उन्होंने कार ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की। ए-4 साइज पेपर में आरसी प्रिंट कर ली। लेकिन ओरिजनल आरसी के लिए वह लखीमपुर से लखनऊ आरटीओ और परिवहन विभाग मुख्यालय तक भटक रहे हैं। लेकिन अफसर उनकी समस्या सुनने तक को तैयार नहीं हैं।
यह समस्या सिर्फ दीपक वर्मा की ही नहीं है। बल्कि प्रदेशभर में 80 हजार से ज्यादा आवेदक मूल आरसी के लिए भटक रहे हैं। दरअसल, परिवहन विभाग ने फेसलेस व्यवस्था लागू कर दी है। आवेदकों को आरटीओ जाने की आवश्यकता नहीं है। आवेदक व्यवस्था के तहत आरसी ऑनलाइन प्रिंट कर रहे हैं, लेकिन मूल आरसी के लिए आरटीओ के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। फेसलेस सेवाओं की खामियों को विभाग की आईटी टीम नजरअंदाज कर रही है। अपर परिवहन आयुक्त, आईटी वीके सिंह के पास लगातार आवेदकों की शिकायतें पहुंच रही हैं। लेकिन फेसलेस सेवाओं की खामियों को दूर करने के लिए उनके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। मूल आरसी के लिए मुख्यालय जाने वालों को भी राहत नहीं मिल रही है। अफसर आवेदकों से मिल तक नहीं रहे हैं। यह हाल तब है, जब फेसलेस सेवाओं को लागू किए हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं। विभागीय सूत्रों ने बताया कि प्रदेशभर में करीब 80 हजार ऐसे वाहन स्वामी मूल आरसी नहीं मिलने से परेशान हैं। इस बाबत एटीसी, आईटी वीके सिंह का कहना है कि फेसलेस सेवाओं में आरटीओ का हस्तक्षेप नहीं है।
वाहन फंसे, चालान का डर
मूल आरसी नहीं मिलने के कारण वाहन स्वामी गाडियां दूसरे प्रदेश नहीं ले जा पा रहे हैं। ऑनलाइन प्रिंट आरसी पर स्पष्ट लिखा है कि यह ओरिजनल नहीं है। ऐसे में बाहर जाने पर वाहन स्वामियों को चालान का डर सताता है। पर, अफसर उनकी समस्याएं नहीं समझ रहे हैं।
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मुख्यालय ने मूंदी आंखें
लखनऊ सहित प्रदेशभर से आरटीओ व एआरटीओ परिवहन मुख्यालय के आईटी डिपार्टमेंट को फेसलेस सेवाओं की खामियों के बारे में पत्र लिख रहे हैं। लेकिन अपर परिवहन आयुक्त, आईटी वीके सिंह संजीदगी नहीं बरत रहे हैं। वाहन स्वामियों का यह भी आरोप है कि अधिकारी मिलते ही नहीं, घंटों बाहर के इंतजार के बाद लाैटा रहे हैं।
दो दिन पहले ही खुल गया एटीएस पोर्टल, जांच
उत्तर प्रदेश में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन(एटीएस) के आवेदन के लिए 12 अक्टूबर को पोर्टल खोला जाना था। इसके बाद ही आवेदन किए जा सकते थे। लेकिन विभाग के सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले शनिवार को ही एटीएस पोर्टल खुल गया। इतना ही नहीं पांच लोगों ने आवेदन भी कर डाले। परिवहन विभाग के अधिकारी अब सकते में हैं कि आखिर ऐसा हो कैसे गया? एटीएस वाहनों की फिटनेस के लिए प्राइवेट सेंटर होते हैं। अपर परिवहन आयुक्त, आईटी वीके सिंह इस मामले में चुप्पी साध गए हैं। सूत्र हैकिंग की आशंका जता रहे हैं।
फेसलेस सेवाओं की खामियों को नजरअंदाज कर रहे एटीसी, आईटी
लखनऊ। दीपक वर्मा लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं। उन्होंने सेकेंड हैंड कार यूपी-31 सीएन 0561 खरीदी। फेसलेस सेवा के तहत उन्होंने कार ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की। ए-4 साइज पेपर में आरसी प्रिंट कर ली। लेकिन ओरिजनल आरसी के लिए वह लखीमपुर से लखनऊ आरटीओ और परिवहन विभाग मुख्यालय तक भटक रहे हैं। लेकिन अफसर उनकी समस्या सुनने तक को तैयार नहीं हैं।
यह समस्या सिर्फ दीपक वर्मा की ही नहीं है। बल्कि प्रदेशभर में 80 हजार से ज्यादा आवेदक मूल आरसी के लिए भटक रहे हैं। दरअसल, परिवहन विभाग ने फेसलेस व्यवस्था लागू कर दी है। आवेदकों को आरटीओ जाने की आवश्यकता नहीं है। आवेदक व्यवस्था के तहत आरसी ऑनलाइन प्रिंट कर रहे हैं, लेकिन मूल आरसी के लिए आरटीओ के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। फेसलेस सेवाओं की खामियों को विभाग की आईटी टीम नजरअंदाज कर रही है। अपर परिवहन आयुक्त, आईटी वीके सिंह के पास लगातार आवेदकों की शिकायतें पहुंच रही हैं। लेकिन फेसलेस सेवाओं की खामियों को दूर करने के लिए उनके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। मूल आरसी के लिए मुख्यालय जाने वालों को भी राहत नहीं मिल रही है। अफसर आवेदकों से मिल तक नहीं रहे हैं। यह हाल तब है, जब फेसलेस सेवाओं को लागू किए हुए करीब दो महीने बीत चुके हैं। विभागीय सूत्रों ने बताया कि प्रदेशभर में करीब 80 हजार ऐसे वाहन स्वामी मूल आरसी नहीं मिलने से परेशान हैं। इस बाबत एटीसी, आईटी वीके सिंह का कहना है कि फेसलेस सेवाओं में आरटीओ का हस्तक्षेप नहीं है।
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वाहन फंसे, चालान का डर
मूल आरसी नहीं मिलने के कारण वाहन स्वामी गाडियां दूसरे प्रदेश नहीं ले जा पा रहे हैं। ऑनलाइन प्रिंट आरसी पर स्पष्ट लिखा है कि यह ओरिजनल नहीं है। ऐसे में बाहर जाने पर वाहन स्वामियों को चालान का डर सताता है। पर, अफसर उनकी समस्याएं नहीं समझ रहे हैं।
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मुख्यालय ने मूंदी आंखें
लखनऊ सहित प्रदेशभर से आरटीओ व एआरटीओ परिवहन मुख्यालय के आईटी डिपार्टमेंट को फेसलेस सेवाओं की खामियों के बारे में पत्र लिख रहे हैं। लेकिन अपर परिवहन आयुक्त, आईटी वीके सिंह संजीदगी नहीं बरत रहे हैं। वाहन स्वामियों का यह भी आरोप है कि अधिकारी मिलते ही नहीं, घंटों बाहर के इंतजार के बाद लाैटा रहे हैं।
दो दिन पहले ही खुल गया एटीएस पोर्टल, जांच
उत्तर प्रदेश में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन(एटीएस) के आवेदन के लिए 12 अक्टूबर को पोर्टल खोला जाना था। इसके बाद ही आवेदन किए जा सकते थे। लेकिन विभाग के सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले शनिवार को ही एटीएस पोर्टल खुल गया। इतना ही नहीं पांच लोगों ने आवेदन भी कर डाले। परिवहन विभाग के अधिकारी अब सकते में हैं कि आखिर ऐसा हो कैसे गया? एटीएस वाहनों की फिटनेस के लिए प्राइवेट सेंटर होते हैं। अपर परिवहन आयुक्त, आईटी वीके सिंह इस मामले में चुप्पी साध गए हैं। सूत्र हैकिंग की आशंका जता रहे हैं।