प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों पर चलेगा सरकार का डंडा
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प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति और छात्रों के प्रति उनके रूख से निराश सरकार ने कड़े फैसले लेने के संकेत दे दिए हैं।
जिसके अंतर्गत शिक्षकों के अंतर्जनपदीय तबादलों पर सरकार फिर से विचार कर सकती है।
इस संबंध में बेसिक शिक्षा राम गोविंद चौधरी ने कहा कि वह प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं।
विधानसभा में मंगलवार को सरकारी विद्यालयों के प्राइमरी एवं जूनियर पाठ्यक्रम में आमूल-चूल परिवर्तन से संबंधित भाजपा के सुरेश कुमार खन्ना के सवाल के जवाब में राम गोविंद चौधरी ने ये बात कही।
शिक्षा में सुधार के लिए मांगा सहयोग
राम गोविंद चौधरी ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए पूरे सदन का सहयोग चाहिए।
सदस्य अपने क्षेत्र में जाएं तो स्कूलों का मुआयना जरूर करें ताकि शिक्षकों में डर पैदा हो। जहां शिक्षकों की कमी है वहां उन विद्यालयों के शिक्षकों को समायोजित किया जाएगा जहां ज्यादा है।
बेसिक शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि बिना पढ़ाए वेतन लेने वाले शिक्षकों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षकों की सारी समस्याओं को दूर कर दिया है। अब उनसे अपेक्षा करेंगे कि पढ़ाई की गुणवत्ता पर ध्यान दें।
शिक्षकों की उपस्थिति पर सरकार की नजर
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि नौकरी सबको चाहिए लेकिन काम कोई नहीं करना चाहता। गुणवत्तापरक शिक्षा व शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उपस्थिति के लिए बायोमीट्रिक प्रणाली लागू करने पर काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों का अंतर्जनपदीय तबादले की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे।
बसपा के इंद्रजीत सरोज ने सवाल उठाया कि शिक्षक मनचाही तैनाती के लिए फर्जी छात्र संख्या दिखाते हैं। मंत्री ने कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी और जहां ऐसा पाया जाएगा सख्त कार्रवाई की जाएगी।