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Lucknow News: डीएल बनाने वाले 15 प्राइवेटकर्मियों से वसूले 45 लाख, नौकरी से भी निकाला

Sun, 15 Feb 2026 05:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 15 Feb 2026 05:06 PM IST
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tranaport dept issue
तीनों निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल, होगी जांच
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पीड़ितों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, परिवहन आयुक्त ने बरती सख्ती

लखनऊ। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले 15 प्राइवेटकर्मियों से पहले नियुक्ति के लिए करीब 45 लाख रुपये वसूले गए। परिवहन विभाग अफसरों के साथ इसका बंटवारा हुआ। फिर कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया। पीड़ितों ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।

परिवहन विभाग में डीएल बनाने, प्रिंटिंग व डिलीवरी का काम तीन एजेंसियों को सौंपा गया है। फोकॉम नेट, सिल्वर टच व रोजमार्टा प्रदेशभर में यह काम कर रही है। इन कंपनियों ने करीब 320 कर्मचारियों की नियुक्ति की। जिनसे नियुक्ति के नाम पर धनराशि भी वसूली गई। कानपुर व आगरा जोन में डीएल का काम देखने वाली फोकॉम नेट के प्रोजेक्ट मैनेजर रहे एसएन पांडेय पर आरोप है कि पंद्रह कर्मचारियों से नियुक्ति के नाम पर 45 लाख रुपये वसूले। सूत्र बताते हैं कि इस धनराशि का बंटवारा परिवहन विभाग अफसरों, कंपनी के साथ हुआ। लेकिन बंटवारे में अनबन होने पर प्रोजेक्ट मैनेजर एसएन पांडेय को बाहर निकाल दिया गया। साथ ही उनके द्वारा नियुक्त किए गए 15 कर्मियों को भी बाहर कर दिया गया। जबकि एसएन पांडेय का कहना है कि कर्मचारियों से कंपनी के निर्देश पर उगाही हुई है, जिसे सीधे ऊपर पहुंचाया गया है। नौकरी से निकाले गए पीड़ितों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसकी शिकायत की है। वीडियो वायरल हुए हैं। हालांकि यह मामला सिर्फ एक कंपनी का नहीं है, बल्कि अन्य दो कंपनियों रोजमार्टा व सिल्वर टच में भी प्राइवेटकर्मियों की नियुक्ति पैसे लेकर हुई है। लेकिन फिलहाल शिकायत फोकॉम नेट के खिलाफ आई है, जिसकी जांच शुरू कर दी गई है।
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दर्ज होगी एफआईआर
जिन कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाल दिया गया है, उन्होंने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। इतना ही नहीं वे कंपनी व पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर एसएन पांडेय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि विभागीय स्तर पर मामले को लेकर क्या कार्रवाई होती है।
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कर्मियों को निकालने की यह भी है वजह
प्राइवेटकर्मियों को नौकरी से बाहर निकालने के पीछे सूत्र एक और वजह बताते हैं। कंपनी की ओर से कम्प्यूटर, वेबकैम, बैटरी वगैरह कर्मियों से ही खरीदवाए गए और बिल कंपनी के नाम बनाने का दबाव बनाया गया। साथ ही उनसे सैलरी की धनराशि भी एडवांस में देने को कहा गया। जिन कर्मियों ने इसका विरोध किया तो उन्हें बाहर कर दिया गया।

आधिकारिक वर्जन
जिन पंद्रह कर्मचारियों से धनराशि की वसूली की गई है, उसमें पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर एसएन पांडेय शामिल थे। इसकी जानकारी होने पर तत्काल उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। प्राइवेटकर्मियों से किसी प्रकार की धनराशि नियुक्ति के लिए कंपनी की ओर से नहीं ली गई है।

-निलय रॉय, डायरेक्टर, फोकॉम नेट

डीएल बनाने वाले प्राइवेटकर्मियों की नियुक्ति से लेकर उनसे वसूली के मामले में 25 जिलों के डीएम को पत्र लिखे गए हैं। हफ्तेभर में जांच रिपोर्ट आने के बाद एक्शन लिया जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
-किंजल सिंह, परिवहन आयुक्त


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