{"_id":"71aff2d7356448580b7e18bd2078a25c","slug":"toxics-drinking-water","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूषित ही नहीं जहरीला भी है शहर का पानी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूषित ही नहीं जहरीला भी है शहर का पानी
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 04 Jul 2014 09:46 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अगर आप सिर्फ गंदे पेयजल को लेकर चिंतित हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि राजधानी का पानी जहरीला भी हो चुका है। राजधानी के भूगर्भ जल में जहरीले रसायन आर्सेनिक की मौजूदगी सुरक्षित स्तर से दो-तीन गुना अधिक पाई गई है।
विज्ञापन
इससे सबसे अधिक गोमतीनगर प्रभावित है। इसलिए समझा जा सकता है कि बुधवार को विधान परिषद में आईआईटीआर द्वारा पानी में अशुद्धता का जो मुद्दा उठा वह यूं ही नहीं है।
विज्ञापन
खुद प्रदेश का भूजल बोर्ड अपने अध्ययन में गोमतीनगर, अलीगंज सहित राजधानी के 9 इलाकों में पानी में आर्सेनिक के उच्च स्तर को लेकर चेता चुका है।
पानी में आर्सेनिक की मौजूदगी से कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। आमतौर एक लीटर पानी में 0.01 मिलीग्राम से अधिक आर्सेनिक नहीं होनी चाहिए।
बोर्ड की जांच में जो परिणाम आए हैं उसमें यह अशुद्धि दो से तीन गुना तक अधिक पाई गई है। गोमतीनगर के पानी में आर्सेनिक स्तर सर्वाधिक 0.03 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया है।
विज्ञापन
चिकित्सक सुझाते है कि आर्सेनिक के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सबसे पहले आर्सेनिक को शरीर में जाने से रोकना होगा। लेकिन गरीब जनता के लिए यह संभव नहीं हो पाता, ऐसे में जरूरी है कि सुरक्षा को लेकर सरकारी स्तर पर प्रयास किए जाएं।
दूसरी ओर बलरामपुर अस्पताल के फिजिशियन डॉ. मनोज अग्रवाल बताते हैं कि पानी से होने वाली बीमारियां हमारे शरीर को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही हैं। बढ़ती आबादी और प्रदूषण के चलते बड़ी आबादी को साफ पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है।
सिविल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. वीवी त्रिपाठी कहते हैं कि पानी में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों की मौजूदगी खतरनाक स्थितियों की ओर इशारा करती है।
यह संभलने और सचेत हो जाने का समय है। लखनऊ विवि के जियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर ध्रुवसेन सिंह कहते हैं कि पानी में आर्सेनिक और अन्य अशुद्धियों से जो बुरे हालात पैदा हो रहे हैं, उनका असर लंबे समय तक रहेगा।
वे इन्हें सुधारने के लिए पानी की क्वालिटी की लगातार निगरानी पर जोर देते हैं। उनका कहना है कि सरकार का जोर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पानी की शुद्धता को मापना होना चाहिए।
साथ ही पानी की क्वालिटी की निगरानी के बाद उसके आंकड़े भी तुरंत सार्वजनिक किए जाने चाहिए, जिससे लोगों में जागरूकता बढ़े।
कहां से आई अशुद्धि
विशेषज्ञों का मानना है कि हमारे प्रदेश के हिमालय के पास होने से पानी में आर्सेनिक अशुद्धि पाई जा रही हैं। हिमालयी चट्टानों के लाखों वर्षों के दौरान घिसने से वातावरण में आर्सेनेट की मौजूदगी बढ़ी और यह पानी के जरिये हम तक पहुंच रहा है।
क्या बला है आर्सेनिक?
आर्सेनिक एक सेमी मटैलिक तत्व है जो आयरन, कैल्शियम, कॉपर आदि के साथ क्रिया करता है। इसे इसके जहरीलेपन की वजह से जाना जाता है। इसमें कैंसर पैदा करने की क्षमता है। यह हवा, पानी, त्वचा या भोजन के संपर्क में आकर हमारे शरीर में पहुंच सकता है।
हमें क्या खतरे?
पानी में सुरक्षित स्तर से अधिक आर्सेनिक होने पर त्वचा रोगों की शुरुआत हो सकती है। इससे आर्टिरियास्कलेरोसिस जैसा नसों का रोग, किडनी के रोग, मानसिक रोग, हृदय रोग पैदा हो सकते हैं। वहीं त्वचा, फेफड़ों, लिवर, किडनी और ब्लैडर का कैंसर भी हो सकता है।