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नायब हों या कमिश्नर नहीं चलेगी बहानेबाजी
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 25 Sep 2014 01:49 PM IST
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मंडल से लेकर तहसील तक तैनात प्रशासनिक अधिकारियों की राजस्व वादों के निपटारे में बहानेबाजी अब नहीं चल पाएगी। उन्हें हर महीने तय संख्या में मुकदमों का निपटारा करना ही होगा।
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राजस्व परिषद के चेयरमैन जावेद उस्मानी ने न्यायिक कार्यों के प्रति अफसरों की बेरुखी को देखते हुए ये निर्देश जारी किए हैं। साथ ही उन्हें न्यायिक कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की ताकीद की है।
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बताते चलें कि प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में इस समय करीब 16.50 लाख मुकदमे लंबित हैं। कई बार ये लंबित मुकदमे कानून-व्यवस्था की स्थिति व विकास कार्यक्रमों पर प्रतिकूल असर डालते हैं।
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कई बार न्यायालयों ने सीधे तौर पर कहा है कि पीठासीन अधिकारी अपने सर्वाधिक महत्वपूर्ण दायित्व के प्रति बेहद उदासीन हैं। प्रशासनिक अफसर इन हालात के लिए कानून-व्यवस्था के मद्देनजर व्यस्तता व हड़ताल आदि का बहाना करते रहे हैं।
इसे लेकर उस्मानी ने सभी मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को दो टूक कहा है कि वे नियमित रूप से न तो न्यायालय का काम कर रहे हैं और न ही अधीनस्थ न्यायालयों का पर्यवेक्षण कर रहे हैं।
नतीजतन बाकी अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारी के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं। उस्मानी ने कमिश्नर से लेकर नायब तहसीलदार तक के लिए मुकदमों के निस्तारण का कैलेंडर जारी किया है।
वहीं अफसरों द्वारा किए जाने वाले न्यायिक कार्यों का उनके कॅरिअर पर सीधा असर पड़ेगा। वादों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण उनके मूल्यांकन का आधार होगा।
किस-किस तरह के मुकदमे मूल्यांकन में जोड़े जाएंगे, इसकी भी रूपरेखा तय कर दी गई है। वार्षिक प्रविष्टि देते समय अफसरों के न्यायिक कार्यों को ध्यान में रखा जाएगा।