फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   time spend by mahatma gandhi in Lucknow.

बापू बोले, 'जैसी अच्छी लखनवी जुबान हैं वैसी ही अच्छी यहां की सड़कें भी बना दो'

Sun, 02 Oct 2016 02:29 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 02 Oct 2016 02:29 PM IST
विज्ञापन
time spend by mahatma gandhi in Lucknow.
कांग्रेस अधिवेशन में लखनऊ आए महात्मा गांधी - फोटो : amar ujala

महात्मा गांधी ने देश के विभिन्न नगरों की कई-कई बार यात्राएं कीं। वे लखनऊ भी आए और कई बार तो काफी दिनों तक यहां रुके भी। लखनऊ में उन्होंने कई ऐसे कार्यक्रमों और समारोहों में हिस्सा लिया जो इतिहास में अपना खासा महत्व रखते हैं।

विज्ञापन


लखनऊ ने उनके आगमन से जुड़ीं कई यादें सहेजकर रखी हैं। गांधी जयंती पर राष्ट्रपिता से जुड़े इन्हीं पृष्ठों को पलट रहे हैं आलोक पराड़कर-

यह सच भी है। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी ने देश भर में काफी यात्राएं कीं। लखनऊ भी इस मायने में खुशनसीब रहा है कि उसे गांधीजी के आतिथ्य सत्कार का कई-कई बार अवसर मिला।
विज्ञापन


महात्मा गांधी कई बार लखनऊ आए और ज्यादातर यात्राओं के दौरान कई-कई दिनों तक यहां प्रवास किया। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण आयोजनों में शिरकत भी की जो स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशिष्ट हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लखनऊ में कांग्रेस का सम्मेलन, लखनऊ पैक्ट, एक-भाषा एक लिपि सम्मेलन, सत्याग्रह समर्थकों की सभा- ऐसे ही कई महत्वपूर्ण आयोजन रहे जिनमें राष्ट्रपिता की भागीदारी रही। नगर में आज भी लखनऊ से उनके गहरे रिश्ते को रेखांकित करती कई स्मृतियां हैं।

अमीरुद्दौला पार्क की विशाल सभा

time spend by mahatma gandhi in Lucknow.

महात्मा गांधी उत्तर प्रदेश, जो पहले संयुक्त प्रांत के नाम से जाना जाता था, के विभिन्न नगरों में लगातार यात्राएं कर लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरित कर रहे थे। रामनाथ सुमन की 1969 में प्रकाशित ‘उत्तर प्रदेश में गांधी’ पुस्तक से इन यात्राओं का विस्तार से पता चलता है।

1921 में उन्होंने 26 फरवरी को लखनऊ में सभा कर विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार की अपील की। उसी वर्ष सात अगस्त को वे फिर लखनऊ आए और अमीरुद्दौला पार्क में विशाल सभा की। कहा जाता है कि उस सभा में एक लाख लोग जमा हुए थे। इसमें उन्होंने एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल दिया।

1925 में 17 अक्तूबर की सभा में उन्होंने हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य पर लखनऊ के लोगों को फटकार भी लगाई और कहा-‘मैं आप लोगों को यह जिम्मेदारी सौंपना चाहता हूं कि जब मैं दूसरी बार लखनऊ आऊं तो आप कह सकें कि इस बीच यहां झगड़ा नहीं हुआ और हिन्दू-मुसलमानों में मेल है।’ उस मौके पर नगर पालिका द्वारा उनका अभिनन्दन किया गया।

दो महीने से अधिक लंबा दौरा किया

time spend by mahatma gandhi in Lucknow.

उन्होंने अमीरुद्दौला पार्क में सभा को सम्बोधित भी किया। 1929 में उन्होंने संयुक्त प्रांत का दो महीने से अधिक लम्बा दौरा किया और इस दौरान भी वह लखनऊ आए। बापू फिर 1934 में 25 जुलाई को लखनऊ आए।

1934 में उन्होंने महिला सभा, बाल सभा और सार्वजनिक सभा में अस्पृश्यता का विरोध करते हुए हरिजन भाइयों को गले लगाने का आह्वान किया। 1936 में गांधी जी करीब एक पखवारे तक लखनऊ में रुके।

28 मार्च से 12 अप्रैल तक का यह वह समय था जब कांग्रेस का यहां सम्मेलन भी आयोजित हो रहा था लेकिन उन्होंने सम्मेलन में शिरकत नहीं की। बापू लखनऊ में कई कार्यक्रमों में गये। उन्होंने ग्रामीण प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया जिसका आयोजन चरखा संघ और अखिल भारतीय ग्रामोद्योग संघ ने किया था।

कांग्रेस अधिवेशन और लखनऊ पैक्ट

time spend by mahatma gandhi in Lucknow.

1916 में महात्मा गांधी का लखनऊ आगमन कई दृष्टि से महत्वपूर्ण था। 26 से 30 दिसंबर तक कई महत्वपूर्ण समारोहों में उन्होंने शिरकत की और कई उल्लेखनीय भाषण दिए। उन्होंने कांग्रेस के 31वें अधिवेशन में भाग लिया।

यह अधिवेशन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में काफी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि इसी सम्मेलन में मुसलमानों को विशेष प्रतिनिधित्व देने के निर्णय के साथ कांग्रेस का मुस्लिम लीग से समझौता हुआ जो मुस्लिम पैक्ट के नाम से जाना गया। इसी अधिवेशन में नरम और गरम दल काफी दिनों बाद एक बार फिर साझा मंच पर आए।

कांग्रेस के इसी अधिवेशन में 28 दिसंबर को महात्मा गांधी ने गिरमिटिया मजदूरों के संबंध में एक प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया जो स्वीकृत हो गया। 1916 के लखनऊ के उसी प्रवास के दौरान महात्मा गांधी ने कई दूसरे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।

उन्होंने 29 दिसंबर को भारतीय एक-भाषा और एक-लिपि सम्मेलन की अध्यक्षता की और राष्ट्रभाषा के लिए भगीरथ प्रयास करने पर बल दिया। 30 और 31 दिसंबर को उन्होंने मुस्लिम लीग की बैठक में शिरकत की और हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल दिया।

सांप्रदायिक सौहार्र्द की इन बातों के लिए लखनऊ एक बेहतर जगह तो थी ही। कांग्रेस सम्मेलन के दौरान लखनऊ आगमन पर ही गांधी और नेहरू की चारबाग रेलवे स्टेशन पर मुलाकात हुई थी जिसकी स्मृति वहां आज भी देखी जा सकती है।

रिफा-ए-आम क्लब में सत्याग्रह समर्थकों की सभा

time spend by mahatma gandhi in Lucknow.

1919 में 11 मार्च को बापू ने रिफा-ए-आम क्लब में एक सभा को संबोधित किया था। उन्होंने सत्याग्रह की तैयारी शुरू कर रखी थी। यह सभा भी सत्याग्रह के समर्थन में ही थी। गांधी उस दौरान पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और लंबा भाषण नहीं दे सके।

उसमें 11 सत्याग्रही स्वयंसेवक तैयार हुए। गांधीजी फिर अगले साल लखनऊ आए और 15 अक्तूबर 1920 को सभा को संबोधित करते हुए कहा-‘यह सरकार डाकू से भी बुरी है। उसने हमारा सब छीन लिया है। इतना ही नहीं, वह हमारी आत्मा पर भी अधिकार करना चाहती है।’

‘मेरा खयाल है कि हिंदुस्तान को घूमकर जितना मैंने देखा है, उतना कांग्रेस के नेताओं में से किसी ने नहीं देखा है।’

-महात्मा गांधी (28 मार्च 1936 को लखनऊ में ग्रामीण प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर)

गांधी जी के भाषणों में लखनऊ जानें कब क्या कहा...

time spend by mahatma gandhi in Lucknow.

‘वह लखनवी उर्दू या संस्कृतमय हिन्दी नहीं हो सकती, हिन्दुस्तानी ही हो सकती है।’ -राष्ट्रभाषा की व्याख्या करते हुए, 17 अक्तूबर 1925

‘जैसी अच्छी आप लोगों की लखनवी उर्दू जबान है, वैसी ही अच्छी आप यहां की सड़कों को भी बना दें।’ -लखनऊ की सड़कें कैसी हैं-बताते हुए, 17 अक्तूबर 1925

‘मैं आप लोगों को यह जिम्मेदारी सौंपना चाहता हूं कि जब मैं दूसरी बार लखनऊ आऊं तो आप कह सकें कि इस बीच यहां झगड़ा नहीं हुआ और हिन्दू-मुसलमानों में मेल है।’ -हिन्दू-मुस्लिम वैमनस्य पर, 17 अक्तूबर 1925

‘जब मैं दिल्ली में 21 दिन का उपवास कर रहा था तब मुझे लखनऊ के हिन्दू और मुसलमान नेताओं का एक पत्र मामले में बीच-बचाव करने के लिए मिला था। मैं उसके लिए तैयार हो गया लेकिन फिर कोई आया ही नहीं।’ -हिन्दू-मुस्लिम वैमनस्य पर, 17 अक्तूबर 1925

‘यदि मैं लखनऊ के फैशनपरस्त नागरिकों से खद्दर के लिए अपील करूं तो यह आशंका है कि आप उसे अनसुना कर दें। किन्तु मैं अपने इस भय के बावजूद भारत के गरीबों की ओर से यह अपील करता हूं।’ -खद्दर के लिए अपील करते हुए, 17 अक्तूबर 1925

बापू की कई स्मृतियां

time spend by mahatma gandhi in Lucknow.

नगर की बापू की कई स्मृतियां सहेजकर रखी हैं। चारबाग रेलवे स्टेशन पर गांधी और नेहरू के मिलन स्थल को रेखांकित किया गया है। यहां बापू की कई प्रतिमाएं लगीं। हजरतगंज की गांधी प्रतिमा नगर में विविध आयोजनों, आंदोलनों की साक्षी रहती है।

सचिवालय का एक भवन बापू भवन के नाम से जाना जाता है। बापू भवन, गांधी भवन सहित नगर में विविध स्थलों पर गांधी की प्रतिमा है। महात्मा गांधी मार्ग, गांधी के नाम पर कई पार्क बार-बार उनकी याद दिलाते हैं।

बापू से जुड़े पत्रों, चित्रों एवं अन्य वस्तुओं का संग्रह गांधी भवन में है जहां पुस्तकालय, वाचनालय, सभागार है और नियमित आयोजन होते हैं।

सत्याग्रह आंदोलन से प्रेरित विद्यालय
राजधानी के हुसैनगंज स्थित चुटकी भंडार गर्ल्स इण्टर कॉलेज की स्थापना भी महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन से प्रेरित है। सत्याग्रहियों के लिए घरों में प्रतिदिन चुटकी भर आटा संग्रहीत करने का आंदोलन चला था। इसी धनराशि के एक हिस्से से विद्यालय की स्थापना कर दी गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed