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सरकारी विभागों में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार

Wed, 27 Jul 2022 01:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jul 2022 01:54 AM IST
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three arrested in fraud for job
लखनऊ। बेरोजगारों को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश मंगलवार को एसटीएफ ने किया। इस गिरोह के तीन सदस्यों को दारुलशफा से गिरफ्तार किया गया। इसमें सचिवालय में तैनात अधिकारी का निजी सचिव भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, निजी सचिव अपने कमरे में ही बेरोजगारों के इंटरव्यू लेता था।
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एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों में सचिवालय के अधिकारी का निजी सचिव विजय कुमार मंडल निवासी नटखेड़ा आलमबाग के अलावा मूलरूप से महराजगंज के सिसवां व लखनऊ में गुडंबा के सावित्रीपुरम का निवासी धर्मवीर सिंह उर्फ अजय सिंह उर्फ धीरू और दिल्ली के स्वरूपनगर का आकाश कुमार शामिल हैं। धर्मवीर पर हरदोई पुलिस ने 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है जिस पर वारंट भी है। टीम ने आरोपियों के पास से छह मोबाइल, सचिवालय के सहायक समीक्षा अधिकारी का फर्जी पहचान पत्र, आठ फर्जी नियुक्ति पत्र, 22 बेरोजगारों के शैक्षिक प्रमाण पत्र, आधारकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैनकार्ड, एटीएम व नकदी बरामद की है।
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सचिवालय स्थित अपने कमरे में लेता था इंटरव्यू
पूछताछ में विजय ने बताया कि उसकी मुलाकात धर्मवीर सिंह से वीवीआईपी गेस्ट हाउस बंदरियाबाग में हुई थी। फिर दोनों साथ में ठगी करने लगे। धर्मवीर धीरे-धीरे कर करीब 70 बेरोजगारों को लेकर उसके सचिवालय स्थित कार्यालय गया जहां पर इंटरव्यू लेने के बाद शैक्षिक प्रमाण पत्र जमा कराए गए। फिर धर्मवीर ने बेरोजगारों को फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिए जिनका फार्मेट बिल्कुल सचिवालय की तरह था। विजय ने बताया कि उसकेऊपर एक ठेकेदार का 35-40 लाख रुपये का कर्ज था जिसे लौटाने के लिए ठगी शुरू की।
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विजय ने बनवाया था फर्जी पहचान पत्र
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक, विजय ने कुबूल किया कि उसने ही आकाश व धर्मवीर सिंह के लिए सहायक समीक्षा अधिकारी का पहचान पत्र बनवाया था। विजय ही फर्जी नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर कर उसे अभ्यर्थी के पते पर भेजवा देता था। फर्जीवाड़े की जानकारी बेरोजगारों को तब होती थी, जब वह सचिवालय में ज्वॉइन करने पहुंचते थे। इस मामले की शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। एसटीएफ के मुताबिक, धर्मवीर ने बताया कि वह अपना नाम बदलकर लोगों से संपर्क करता था। अजय सिंह नाम से उसने फर्जी आधारकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस व सचिवालय का पहचान पत्र भी बनवाया है।
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