बाबरी विध्वंस के आरोप से राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नहीं बन सके महंत नृत्यगोपाल दास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छह दिसंबर 1992 को गिराई गई बाबरी मस्जिद के क्रिमिनल केस से राममंदिर आंदोलन के शीर्ष संतों समेत विहिप-संघ के कई बड़े नेताओं को झटका लगा है। पहले श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में महंत नृत्यगोपाल दास का ही नाम था। विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय को लेकर भी बाबरी मस्जिद मामले की सीबीआई जांच में आरोपी होने से दोनों को संस्थापक ट्रस्टी से बाहर रखना सरकार की मजबूरी हो गई।
यह सच्चाई बृहस्पतिवार को सुबह तब सामने आई, जब नृत्यगोपाल दास को लेकर शीर्ष संत-धर्माचार्यों ने सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। आनन-फानन गृह मंत्रालय ने यहां के अफसरों के जरिए स्थिति संभाली और विरोध में दोपहर तीन बजे होने वाली संतों की बैठक रद्द करवाई।
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब संसद में अयोध्या में भव्य राममंदिर बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जिक्र करके नए ट्रस्ट श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र बनाने का एलान किया तो यहां के संत-धर्माचार्य समेत अयोध्यावासी महंत नृत्यगोपालदास को इसका संस्थापक अध्यक्ष तय मान रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे अंधियारा गहराया नए-नए नाम सामने आते गए।
गृह मंत्रालय के अवर सचिव खेला राम मुर्मू ने बुधवार को 100 रुपये के स्टांप पेपर पर ट्रस्ट पंजीकृत कराया और फिर उसे के परासरन को स्थानांतरित कर दिया। 15 सदस्यीय ट्रस्ट के स्थायी नौ सदस्यों में श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास समेत अयोध्या के किसी शीर्ष संत का नाम नहीं था। विहिप-आरएसएस की चर्चा में चल रहे नामों का भी अतापता नहीं था।
महंत नृत्यगोपालदास ने राज्य व केंद्र सरकार के लोगों से जताई नाराजगी
शीर्ष प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि अध्यक्ष बनाने का दावा करने वाले राज्य व केंद्र सरकार के जिम्मेदार लोगों से महंत नृत्यगोपाल दास ने अपना नाम न देख बुधवार को ही विरोध जताया। वे तब लखनऊ में थे, राज्य के जिम्मेदार लोगों के साथ उनकी गृहमंत्री अमित शाह से भी बात कराई गई। इस बीच बृहस्पतिवार को महंत नृत्य गोपालदास अयोध्या लौटे तो नाराज संतों-महंतों ने मणिरामदास की छावनी जाकर उनसे बात की।
इस दौरान महंत नृत्यगोपालदास बेहद तल्ख नजर आए। सरकार व उसके नए ट्रस्ट के खिलाफ मुखर हो गए। विरोध बढ़ता देख जिला प्रशासन ने राज्य सरकार व केंद्रीय गृह मंत्रालय को हालात की जानकारी दी। अंतत: फिर गृह मंत्रालय सक्रिय हुआ और ट्रस्ट में नाम न शामिल होने की पूरी सच्चाई स्पष्ट की गई।
सूत्र बताते हैं कि महंत नृत्यगोपाल दास को समझाया गया कि वे ही अध्यक्ष तय थे, विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय का भी नाम था। मगर बाबरी मामले में सीबीआई जांच में नाम आने से बाहर करना मजबूरी थी। यहां तक कहा गया कि नया ट्रस्ट केंद्र ने बनाया है, उसमें सीधे-सीधे बाबरी मस्जिद गिराने के आरोपियों को कतई नहीं शामिल किया जा सकता। इस क्रिमिनल केस को सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में कोट कर चुका है और पूरी तरह अवैधानिक माना है। ऐसे में ट्रस्ट को कोर्ट में चुनौती देने पर दिक्कत होती। इस आश्वासन के बाद दोपहर तीन बजे संतों की विरोध में होने वाली बैठक रद्द कर दी गई।
ट्रस्ट कर सकता नृत्यगोपालदास व चंपत राय का चयन
ट्रस्ट के दो सदस्यों के चयन का अधिकार ट्रस्ट के मौजूदा सदस्यों को दिया गया है, जो मतदान के बाद बहुमत के आधार पर इनका चयन करेंगे। सूत्र बताते हैं कि सरकार की ओर से ट्रस्ट गठन में भले ही महंत नृत्यगोपाल दास व विहिप उपाध्यक्ष चंपत राय का नाम नहीं है, मगर ट्रस्ट की ओर से इन्हें चयनित करने में बाबरी मस्जिद की क्रिमिनल केस का नियम लागू नहीं हो सकता है।
इन दोनों सदस्यों के चुनाव में सरकार की ओर से मनोनीत आईएएस अधिकारी व अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में पदेन सदस्य भाग नहीं ले सकेंगे। इसका 15वां सदस्य भी पदेन होगा, जो ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर कांप्लेक्स के विकास और प्रशासनिक देखरेख के लिए बनने वाली कमेटी का अध्यक्ष होगा। इसका चयन भी ट्रस्ट के सदस्य ही करेंगे।
बेहद तल्ख थे संत
- महंत नृत्य गोपाल दास बृहस्पतिवार को अयोध्या लौटे तो, सुबह उनके यहां राममंदिर आंदोलन से जुड़े दर्जनों शीर्ष संत मिलने मणिरामदास की छावनी पहुंचे। बंद कमरे में घंटे भर चर्चा के बाद महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि सरकार का नया ट्रस्ट अयोध्या वाले स्वीकार नहीं करेंगे। इसमें राजनीतिक लोग कैसे शामिल किए गए।
दिगबंर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि राममंदिर के लिए जिन लोगों ने जिंदगी खपा दी, उनकी उपेक्षा करने वाली सरकार का संत विरोध करेंगे। तय हुआ कि दोपहर तीन बजे विरोध सभा करके प्रधानमंत्री को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
महंत गिरिशपति त्रिपाठी, संत समिति के अध्यक्ष कंहैयादास रामायणी, श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महंत शशिकांत दास, महंत गिरीश दास आदि संतों की उपेक्षा खासकर महंत नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष न बनाए जाने से बेहद नाराज थे।
भाजपा नेता पहुंचे मनाने
राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास को मनाने के लिए भाजपा ने अपने तीन नेता उनके पास भेजे। भाजपा ने अयोध्या से विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय और अयोध्या महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा को मणि रामदास मंदिर भेजा। हालांकि संतों ने नेताओं को प्रवेश ही नहीं दिया जिसके बाद उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
इसके बाद महंत ने तीन बजे संतों की आपात बैठक बुलाई और कहा कि पांच बजे संवाददाता सम्मेलन किया जाएगा। महंत कमल नयन नाथ ने बताया कि बाद में मंदिर प्रशासन ने बैठक में बताया कि संवाददाता सम्मेलन रद्द कर दिया गया है क्योंकि उन्हें गृह मंत्रालय से एक फोन आया है।
गुप्ता ने बताया कि उन्होंने महंत और गृह मंत्री अमित शाह के बीच फोन पर बात करने की व्यवस्था की। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट में तीन पद अभी खाली हैं और महंत को उसमें शामिल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे संत को शांत कर पाए हैं। इससे पहले महंत ने कहा था कि जिन्होंने मंदिर अभियान के लिए जीवन अर्पित कर दिया, उनकी उपेक्षा हुई है।