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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   This is why BJP declared Archana Verma its mayor candidate in Shahjahanpur.

UP Nikay Chunav: भाजपा को शाहजहांपुर में नहीं मिला मजबूत उम्मीदवार, अर्चना वर्मा को टिकट देने पर हल्का विरोध

Tue, 25 Apr 2023 10:27 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 25 Apr 2023 10:27 AM IST
सार

यूपी में वर्तमान राजनीतिक माहौल में भाजपा का टिकट मिलना जीत की गारंटी माना जा रहा है। इसके बावजूद भाजपा ने सपा की घोषित हो चुकी प्रत्याशी को पार्टी में शामिल कर अपना उम्मीदवार बना दिया। इसका पार्टी कार्यकर्ताओं ने हल्का विरोध किया है।

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This is why BJP declared Archana Verma its mayor candidate in Shahjahanpur.
कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व अर्चना वर्मा। (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

विस्तार

भाजपा को शाहजहांपुर नगर निगम में महापौर पद के लिए कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं मिला। तब भाजपा ने सपा के पुराने राजनीतिक घराने में दरार लगा दी। शाहजहांपुर नगर निगम बनने के बाद पहली बार चुनाव हो रहा है। यहां महापौर का पद पिछड़े वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है।

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सूत्रों के मुताबिक शाहजहांपुर में महापौर प्रत्याशी चयन का चयन कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना और सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर की सहमति से ही होना था। पार्टी में महापौर पद के लिए महानगर अध्यक्ष अरुण गुप्ता की पत्नी, सभासद वेद प्रकाश मौर्य की पत्नी और महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष शिल्पी गुप्ता का नाम प्रमुखता से सामने आया था। वहीं कुछ अन्य दावेदार भी थे। मगर शाहजहांपुर से लेकर लखनऊ तक हुए मंथन में पार्टी इन नामों पर जीत के प्रति आश्वस्त नजर नहीं आई।
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गौरतलब है कि शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद में बीते दो दशक से सपा का कब्जा रहा है। नगर निगम के महापौर पद के लिए सपा ने पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा की पुत्रवधू व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अर्चना वर्मा को प्रत्याशी बनाया था। शाहजहांपुर में नगर निगम में 3.26 लाख मतदाता हैं। इनमें सर्वाधिक एक लाख से अधिक मुस्लिम, 25 हजार लोधी और लगभग 20 हजार यादव मतदाता हैं। ऐसे में सपा का पलड़ा शुरुआत से ही भारी नजर आ रहा था। पार्टी ने बाजी पलटने के लिए अर्चना वर्मा को ही भाजपा में शामिल करने की रणनीति बनाई।

सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान भी अर्चना को भाजपा में शामिल करने की तैयारी थी लेकिन, उस समय उनके पति राजेश वर्मा के ददरौल से सपा प्रत्याशी घोषित होने के कारण बात नहीं बनी। अर्चना को विश्वास दिलाया गया कि उन्हें महापौर का प्रत्याशी बनाया जाएगा। मौजूदा माहौल में राजनीतिक हल्कों में महापौर चुनाव में भाजपा के टिकट को जीत की गारंटी माना जाता है, ऐसे में अर्चना ने भी सत्तारूढ़ दल का दामन थामना उचित समझा।

सुरेश खन्ना ने साधे एक तीर से दो निशाने

सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। एक तो उन्होंने सपा का महापौर उम्मीदवार छीनकर अपने राजनीतिक कौशल का लोहा मनवाया। दूसरा, शाहजहांपुर में भाजपा के नेताओं में उनके कद का कोई दूसरा नेता जल्द खड़ा न हो इसका इंतजाम कर दिया है।

सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी
अर्चना वर्मा को महापौर प्रत्याशी बनाने को लेकर भाजपा के किसी बड़े नेता या विधायक की नाराजगी सामने नहीं आई है। अलबत्ता कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि पार्टी अपने किसी कार्यकर्ता को टिकट देती तो वह भी चुनाव जीत सकता था। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के पदाधिकारी आपसी बातचीत में तो इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं, लेकिन कोई खुलकर मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा रहा है।

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