चारबाग स्टेशन : यहां पहली बार मिले थे गांधी और नेहरू, रेलवे ने स्मृति के रूप में बनाया है उद्यान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्रिसमस का उल्लास चारों ओर था। गिरिजाघरों को भव्य रूप से सजाया गया था। साल था 1916, तारीख थी 26 दिसंबर और जगह थी चारबाग रेलवे स्टेशन। यह वही मुकद्दस तारीख थी, जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पं. जवाहरलाल नेहरू की पहली मुलाकात हुई थी। इस यादगार मुलाकात के निशां आज भी स्टेशन पर मौजूद हैं और रेलवे ने स्मृति स्वरूप यहां गांधी उद्यान बनवाया है, जहां एक शिलापट्ट भी लगा हुआ है।
चारबाग रेलवे स्टेशन उत्तर रेलवे का ए-वन श्रेणी का स्टेशन है। यह स्टेशन ऐतिहासिक है। स्मारक के लिहाज से भी और इस मामले में भी कि गांधीजी और जवाहरलाल नेहरू की पहली मुलाकात यहीं हुई थी।
इतिहासविद् विनीत चतुर्वेदी बताते हैं कि इंडियन नेशनल कांग्रेस की वार्षिक मीटिंग में शामिल होने के लिए 26 दिसंबर, 1916 को 27 वर्षीय जवाहरलाल नेहरू इलाहाबाद से लखनऊ ट्रेन से आए थे। इसी मीटिंग में शामिल होने के लिए महात्मा गांधी भी आए हुए थे और चारबाग स्टेशन के पास ही दोनों की मुलाकात हुई। करीब 20 मिनट तक दोनों के बीच बातचीत हुई। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम के बाबत बाचतीत हुई। पं. नेहरू ने इस बारे में अपनी आत्मकथा में भी जिक्र किया है।
नेहरू जी ने कही है ये बातें
लिखा है कि महात्मा गांधी जी साउथ अफ्रीका में हुई घटना को लेकर कैसे आगे आए। इसमें अहिंसा आंदोलन व चम्पारण जीत वगैरह का जिक्र किया है। नेहरू ने गांधी जी से देश के युवाओं और मजदूर वर्ग की ओर ध्यान देने की अपील की थी।
नेहरू चाहते थे कि गांधी देश के मजदूरों को विदेशों में जाकर काम करने से रोकें। दरअसल, उस वक्त अंग्रेजी हुकूमत हिंदुस्तानियों को अफीक्रा, कैरिबियाई देशों, फिजी वगैरह में मजदूरी के लिए ले जाया करते थे, जिसका विरोध किया गया। इस बिल को नेहरू ने कांग्रेसियों के सामने रखा था, जिसका गांधी जी ने समर्थन भी किया था।
इसके बाद जब चारबाग रेलवे स्टेशन का विस्तार हुआ और देश आजाद हुआ तो रेलवे ने इस यादगार लमहों को संजोने के लिए वहां गांधी उद्यान बना दिया, जहां हेरिटेज इंजन रखा हुआ है और एक शिलापट्ट भी लगा है, जिसमें इस मुलाकात का जिक्र है।
बापू ने गोखले मार्ग पर लगाया था पेड़
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का लखनऊ आना-जाना लगा रहता था। पर, आजादी के कुछ बरस पहले, जब वह लखनऊ आए तो यहां गोखले मार्ग पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष शीला कौल के घर गए थे, जहां अपने हाथों से उन्होंने एक पौधा लगाया था, जो पेड़ बन गया। ऐसे ही महिलाओं के लिए एक पाक्र की नींव डाली, जिसे जनाना पार्क के नाम से जाना जाता है।