अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट तय करेगा तराशे गए पत्थरों का भविष्य, दान में लेकर प्रयोग करने की अटकलें
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बुधवार को राममंदिर ट्रस्ट की घोषणा कर दी। ट्रस्ट में जिन 15 सदस्यों को जगह दी गई हैं उनमें विहिप का एक भी सदस्य नहीं है। इससे सवाल उठता है कि अयोध्या में विहिप की कार्यशाला में राममंदिर के लिए तराशे गए पत्थरों का भविष्य क्या होगा।
दूसरी ओर राममंदिर के लिए तराशे गए पत्थरों की उपयोगिता पर मंथन भी तेज हो गया है। इन पत्थरों का राममंदिर में किस तरह प्रयोग किया जाएगा ये अभी भविष्य के गर्भ में है लेकिन इतना तय है कि राममंदिर के लिए तराशे गए पत्थरों की उपयोगिता अब नवगठित ट्रस्ट को ही तय करनी है। हालांकि विहिप को अब भी उम्मीद है कि राममंदिर उनके प्रस्तावित मॉडल एवं तराशे गए पत्थरों से ही बनेगा।
करोड़ों रुपये लागत के पत्थरों को विहिप के मॉडल पर बनने वाले मंदिर के हिसाब से तराशा गया है। अभी ट्रस्ट ने मंदिर का मॉडल तय नहीं किया है। अमित शाह ये जरूर कह चुके हैं कि अयोध्या में बनने वाला मंदिर गगनचुंबी होगा। इसके बाद से ही विहिप के मॉडल की लंबाई-चौड़ाई पर सवाल उठने लगे थे। अब ट्रस्ट में विहिप के एक भी प्रतिनिधि को शामिल नहीं किए जाने के बाद तराशे गए इन पत्थरों की उपयोगिता भी सवालों के घेरे में आ गई है।
ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि नवगठित ट्रस्ट इन पत्थरों को दान में लेकर मंदिर निर्माण में उपयोग कर सकता है। वहीं विहिप बिना किसी शुल्क के यह पत्थर दे सकती है, क्योंकि यह जनमानस से सहयोग लेकर तैयार कराए गए हैं। 1991 में जब राममंदिर कार्यशाला शुरू हुई तो 125 कारीगर और शिल्पी लगे थे। ढांचा विध्वंस के बाद काम प्रभावित हुआ लेकिन 50 कारीगरों ने काम जारी रखा। 10 साल तक 50 कारीगर ही लगे रहे। 2007-2010 तक पत्थरों की कमी के कारण काम बंद रहा। 2011 से काम फिर शुरू हुआ और पांच कारीगरों और पांच मजदूरों को लगाया गया।
यह है विहिप के मंदिर का मॉडल
राममंदिर निर्माण के लिए रामनगरी का जो कोना सर्वाधिक बेकरार प्रतीत होता है। वह राम जन्मभूमि न्यास कार्यशाला है। यहां सिंतबर 1991 से ही रामजन्मभूमि पर प्रस्तावित मंदिर के लिए पत्थरों की तराशी चल रही है।
विहिप नेता अशोक सिंहल की अगुवाई में तैयार हुए मॉडल के अनुसार राममंदिर की लंबाई 268 फीट पांच इंच, चौड़ाई 140 फीट और ऊंचाई 128 फीट होगी। मंदिर में कुल 212 खंभे बनेंगे। इसमें से 16 फीट ऊंचाई के 106 खंभे पहली मंजिल पर और इतने ही खंभे 14 फीट छह इंच ऊंचाई के दूसरी मंजिल पर लगेंगे।
इन सभी खंभों में 16 मूर्तियां होंगी। मंदिर के अगले भाग में सिंहद्वार, नृत्य मंडप, रंगमंडप और गर्भगृह बनेगा। इसी गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति लगाई जाएगी।
कमलनयन दास बोले- विहिप के मॉडल पर ही बनेगा राममंदिर
श्रीराम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य व मणिरामदास की छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने दावा किया है कि राममंदिर निर्माण रामनवमी से शुरू होगा। राममंदिर निर्माण की तैयारी पूरी कर ली गई है। विहिप के प्रस्तावित मॉडल के अनुसार ही राममंदिर बनेगा।
विहिप के प्रांतीय प्रभारी शरद शर्मा का कहना है कि राममंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम बहुत पहले से चल रहा है। हमारी मंशा है कि आम जनमानस की भावना के अनुरूप ही इन पत्थरों का उपयोग हो। ट्रस्ट को ही फैसला लेना है, हमें उम्मीद है कि आम लोगों के इन पत्थरों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।