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पुलिस का अमानवीय चेहरा : चोरी कुबूल न करने पर किशोर को बेरहमी से पीटा, कर दी ये हालत

Sat, 29 Jun 2019 04:59 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Sat, 29 Jun 2019 04:59 PM IST
third degree torture by police to a teenager who refused to commit a theft in lucknow
मनीष - फोटो : amar ujala
राजाधानी पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है। ई-रिक्शा की चोरी न कुबूल करने पर तेलीबाग पुलिस चौकी इंचार्ज व तीन सिपाहियों ने एक किशोर को तीन घंटे तक बंधक बनाकर डंडों से पीटा, बूट से कुचला। मां ने पैर पकड़कर बेटे के जान की भीख मांगी तो धमकाते हुए कहा कि बेटे से कह दो कि चोरी कुबूल कर ले, नहीं तो जेल में डाल देंगे। 

 
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माता-पिता के साथ मनीष - फोटो : amar ujala

इसके बाद पीड़ित मां-पिता के साथ शुक्रवार शाम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कैंप कार्यालय पहुंचा। इसकी भनक लगते ही एएसपी उत्तरी व सीओ कैंट हरकत में आ गईं। आनन-फानन किशोर को सिविल अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

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मनीष को गोद में उठाए पिता - फोटो : amar ujala
पीजीआई थानाक्षेत्र की वृंदावन कॉलोनी के सेक्टर-5 निवासी राम कुमार का बेटा मनीष (15) उर्फ छोटू ई-रिक्शा चलाता है। मनीष के मुताबिक, वह तेलीबाग के खरिका निवासी अमरेश गौतम का ई-रिक्शा चलाता था। 24 जून को ई-रिक्शा चोरी हो गया। अमरेश ने तेलीबाग पुलिस चौकी में इसकी शिकायत की। इस पर बृहस्पतिवार शाम तीन सिपाही रामकुमार के घर पहुंचे और मनीष को उठा ले गए। 
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third degree torture by police to a teenager who refused to commit a theft in lucknow
मनीष को गोद में उठाए पिता - फोटो : amar ujala
मनीष का आरोप है कि तीनों सिपाही व चौकी प्रभारी ने उसे चौकी के अंदर बंधक बना लिया और चोरी का कुबूलने का दबाव बनाने लगे। विरोध पर उसे डंडे से पीटा। इसके बाद फर्श पर लिटाकर बूट से कुचलना शुरू कर दिया। परिवारीजन चौकी पर पहुंचे तो अंदर से मनीष की चीखें सुनाई दे रही थीं, लेकिन पुलिसकर्मियों ने दरवाजा नहीं खोला। 

 
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मनीष - फोटो : amar ujala

मां शांति देवी के मुताबिक, तीन घंटे बाद चौकी का दरवाजा खुला तो अंदर मनीष फर्श पर पड़ा कराह रहा था। इसके बाद पुलिसकर्मी उसे अपराधियों की तरह घसीटते हुए जीप में डालने लगे। यह देख शांति बारी-बारी से सभी पुलिसकर्मियों के पैर पकड़कर उसे छोड़ने की गुहार लगा रही थीं, लेकिन वे उसके साथ भी बदसलूकी कर रहे थे। 

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