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Lucknow News: दूसरों के नाम पर खोले खाते में भेजते थे ठगी की रकम
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गिरफ्त में आए ठगी के आरोपी।
गोसाईंगंज। दूसरों के नाम पर खोले खातों में ठगी की रकम भेजने वाले चार साइबर जालसाजों को सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने क्षेत्र में आवास विकास योजना स्थित लाइट हाउस के फ्लैट से सोमवार को गिरफ्तार किया। इनसे 79 चेकबुक, 77 डेबिट कार्ड, 29 सिम कार्ड, 15 मोबाइल, 14 कीपैड मोबाइल, छह पीओएस मशीनें, तीन लैपटॉप समेत फर्जी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज व अन्य सामान बरामद हुआ है।
एडीसीपी दक्षिणी रल्लापल्ली वसंथ कुमार के मुताबिक रविवार दोपहर सूचना मिलने के बाद पुलिस फ्लैट नंबर 1010 पर पहुंची तो चार आरोपी लैपटॉप और मोबाइल से रकम का ट्रांजेक्शन करते मिले। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बिहार के पूर्वी चंपारण का निप्पु कुमार, मनीष कुमार, सन्नी व उन्नाव का सत्येन्द्र है। पुलिस ने एनसीआरपी पोर्टल पर जांच की तो गिरोह के पास मिले बैंक खातों के खिलाफ देशभर से हजारों शिकायतें दर्ज मिलीं।
फर्जी कंपनी का संचालक बनाकर खुलवाते थे खाते
एसीपी गोसाईंगंज ऋषभ यादव ने कहा कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे दूसरे राज्यों के लोगों को लालच देकर केवाईसी के बहाने उनके आधार में पता बदलकर यूपी का निवासी दर्शाते थे। फिर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां रजिस्टर्ड करते थे और उन्हें ही इनका संचालक बनाकर दस से अधिक बैंकों में कंपनी का चालू खाता खुलवाते थे। इन खातों की चेकबुक, एटीएम कार्ड, सिम और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी म्यूल किट के रूप में तैयार कर सरगनाओं को उपलब्ध कराई जाती थी। शातिर साइबर ठगी, ऑनलाइन बेटिंग और अन्य अवैध तरीके से अर्जित रकम को खातों और क्रिप्टो के माध्यम से खपाते थे।
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एडीसीपी दक्षिणी रल्लापल्ली वसंथ कुमार के मुताबिक रविवार दोपहर सूचना मिलने के बाद पुलिस फ्लैट नंबर 1010 पर पहुंची तो चार आरोपी लैपटॉप और मोबाइल से रकम का ट्रांजेक्शन करते मिले। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बिहार के पूर्वी चंपारण का निप्पु कुमार, मनीष कुमार, सन्नी व उन्नाव का सत्येन्द्र है। पुलिस ने एनसीआरपी पोर्टल पर जांच की तो गिरोह के पास मिले बैंक खातों के खिलाफ देशभर से हजारों शिकायतें दर्ज मिलीं।
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फर्जी कंपनी का संचालक बनाकर खुलवाते थे खाते
एसीपी गोसाईंगंज ऋषभ यादव ने कहा कि आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे दूसरे राज्यों के लोगों को लालच देकर केवाईसी के बहाने उनके आधार में पता बदलकर यूपी का निवासी दर्शाते थे। फिर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां रजिस्टर्ड करते थे और उन्हें ही इनका संचालक बनाकर दस से अधिक बैंकों में कंपनी का चालू खाता खुलवाते थे। इन खातों की चेकबुक, एटीएम कार्ड, सिम और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी म्यूल किट के रूप में तैयार कर सरगनाओं को उपलब्ध कराई जाती थी। शातिर साइबर ठगी, ऑनलाइन बेटिंग और अन्य अवैध तरीके से अर्जित रकम को खातों और क्रिप्टो के माध्यम से खपाते थे।
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