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कॉपियों के गलत मूल्यांकन पर दंड का भी हो प्रावधान : आनंदीबेन पटेल
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राजभवन में प्रस्तुतिकरण के दौरान मौजूद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व अन्य। स्रोत ः राजभवन
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लखनऊ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कॉपियों की मूल्यांकन प्रक्रिया को और बेहतर करने के क्रम में कहा है कि इनकी जांच काफी सावधानी से की जानी चाहिए। गलत मूल्यांकन मिलने पर आर्थिक दंड का प्रावधान भी होना चाहिए। सुझाव दिया कि पीजी छात्रों से भी सीमित संख्या में स्नातक कक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन कराया जा सकता है।
राजभवन में राज्यपाल ने शुक्रवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) द्वारा परीक्षा के लिए इस्तेमाल की जा रही डिजिटल व्यवस्था का प्रस्तुतिकरण देखा। कहा कि कॉपियों के मूल्यांकन के दौरान जहां गलती हो, वहीं स्पष्ट रूप से अंकित किया जाना चाहिए, ताकि पुनः जांच कराने वाले विद्याथी अपनी कमियों को समझ सकें। उन्होंने अभिभावकों को भी बच्चों की शैक्षणिक स्थिति के प्रति संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि बच्चों की रुचि के अनुसार विषयों का चयन एवं आवश्यक कौशल विकसित किया जाना चाहिए, क्योंकि रुचि के क्षेत्र में बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। नकल में संलिप्त पाए जाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे संवाद किया जाना चाहिए।
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इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी राज्यपाल डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, विशेष कार्याधिकारी शिक्षा पंकज एलजानी, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय व परीक्षा नियंत्रक प्रो. दीपक नगरिया आदि उपस्थित थे।
राज्यपाल ने कहा कि कॉपियों का आकलन करें कि विद्यार्थी औसतन कितने पेज लिखते हैं। उसी से कॉपियों की पेज संख्या निर्धारित करें। इससे अनावश्यक पेज की बर्बादी रुकेगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पेज उपलब्ध कराएं। उन्होंने निर्देश दिया कि विद्यार्थियों के हित में मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक प्रभावी, निष्पक्ष एवं तकनीक आधारित बनाया जाए।
प्रस्तुतिकरण में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी व निष्पक्ष बनाने के लिए परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से विश्वविद्यालय के कमांड सेंटर से लाइव मॉनिटरिंग की जाती है। कॉपियों पर बारकोडिंग, बायोमीट्रिक आधारित उपस्थिति आदि तकनीकी व्यवस्थाएं लागू हैं। परीक्षा केंद्रों से प्राप्त कॉपियों को विश्वविद्यालय में स्कैन किया जाता है। इससे उनमें किसी भी प्रकार के बदलाव की संभावना नहीं रहती है।
राजभवन में राज्यपाल ने शुक्रवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) द्वारा परीक्षा के लिए इस्तेमाल की जा रही डिजिटल व्यवस्था का प्रस्तुतिकरण देखा। कहा कि कॉपियों के मूल्यांकन के दौरान जहां गलती हो, वहीं स्पष्ट रूप से अंकित किया जाना चाहिए, ताकि पुनः जांच कराने वाले विद्याथी अपनी कमियों को समझ सकें। उन्होंने अभिभावकों को भी बच्चों की शैक्षणिक स्थिति के प्रति संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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उन्होंने कहा कि बच्चों की रुचि के अनुसार विषयों का चयन एवं आवश्यक कौशल विकसित किया जाना चाहिए, क्योंकि रुचि के क्षेत्र में बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। नकल में संलिप्त पाए जाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे संवाद किया जाना चाहिए।
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इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी राज्यपाल डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, विशेष कार्याधिकारी शिक्षा पंकज एलजानी, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय व परीक्षा नियंत्रक प्रो. दीपक नगरिया आदि उपस्थित थे।
राज्यपाल ने कहा कि कॉपियों का आकलन करें कि विद्यार्थी औसतन कितने पेज लिखते हैं। उसी से कॉपियों की पेज संख्या निर्धारित करें। इससे अनावश्यक पेज की बर्बादी रुकेगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पेज उपलब्ध कराएं। उन्होंने निर्देश दिया कि विद्यार्थियों के हित में मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक प्रभावी, निष्पक्ष एवं तकनीक आधारित बनाया जाए।
प्रस्तुतिकरण में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी व निष्पक्ष बनाने के लिए परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से विश्वविद्यालय के कमांड सेंटर से लाइव मॉनिटरिंग की जाती है। कॉपियों पर बारकोडिंग, बायोमीट्रिक आधारित उपस्थिति आदि तकनीकी व्यवस्थाएं लागू हैं। परीक्षा केंद्रों से प्राप्त कॉपियों को विश्वविद्यालय में स्कैन किया जाता है। इससे उनमें किसी भी प्रकार के बदलाव की संभावना नहीं रहती है।

राजभवन में प्रस्तुतिकरण के दौरान मौजूद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व अन्य। स्रोत ः राजभवन