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प्रो. सूर्यकांत पर सरकारी नीतियों की आलोचना का आरोप, कमेटी करेगी जांच

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jun 2020 03:13 AM IST
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there is blame against professor suryakant for condemning government policy
लखनऊ। केजीएमयू के रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत पर सरकार की नीतियों की आलोचना करने के आरोप लगे हैं। शासन सचिव के निर्देश पर केजीएमयू प्रशासन ने पांच सदस्य कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। प्रो. सूर्यकांत ने एक टीवी चैनल की परिचर्चा में हिस्सा लिया था। इस चैनल में उनके द्वारा दिए गए वक्तव्य से संबंधित ब्यौरा केजीएमयू प्रशासन को भेजा गया है। 10 जून को उपसचिव कुलदीप कुमार रस्तोगी ने केजीएमयू कुलपति को भेजे पत्र में कहा है कि निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क ने वीडियो फुटेज उपलब्ध कराए हैं। इसमें सरकार की नीतियों की आलोचना की गई है। यह सरकारी सेवा आचरण नियमावली 1956 का उल्लंघन भी है। पत्र में इस बात का भी जिक्र है कि उन्हें परिचर्चा में हिस्सा लेने के लिए न तो अधिकृत किया गया था और ना ही उन्होंने इस संबंध में पूर्व में कोई अनुमति ली थी। भेजे गए पत्र में यह भी कहा गया है कि मामले में कार्यवाही कर जल्द से जल्द अवगत कराएं। जांच कमेटी गठित शासन से कार्रवाई संबंधी पत्र मिलते ही कुलसचिव ने पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। मेडिसिन संकाय की डीन प्रो. विनीता दास की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में डीन स्टूडेंट वेलफेयर, फैकल्टी इंचार्ज आईटी सेल, चीफ प्रॉक्टर और विजिलेंस ऑफिसर केजीएमयू को शामिल किया गया है। कमेटी को तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है।  
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मैंने खिलाफ में नहीं बोला मैंने सरकार की नीतियों के खिलाफ नहीं बोला है। कोरोना से आगरा, कानपुर सहित तीन शहर ज्यादा प्रभावित थे। उसकी रिपोर्ट शासन को दी थी। पूरे इंटरव्यू में कोरोना से दहशत को कैसे रोका जाए इसी पर फोकस किया गया है। डायबिटीज, कैंसर सहित विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीड़ितों में कोरोना का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए निजी अस्पतालों का खुलना जरूरी है। क्योंकि 60 से 70 फीसदी लोगों को निजी अस्पतालों से इलाज मिलता है। मैं आईएमए का पदाधिकारी हूं। ऐसे में निजी अस्पताल के डॉक्टरों की सुरक्षा की बात रखी है। मैं तो सरकार की ओर से चलने वाली विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में निरंतर लोगों को बताता रहता हूं। - प्रो. सूर्यकांत, विभागाध्यक्ष रेस्पिरेट्री मेडिसिन केजीएमयू।
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वीसी की दौड़ में भी शामिल डॉ. सूर्यकांत केजीएमयू कुलपति पद की दौड़ में शामिल हैं। इससे पहले भी उन पर केजीएमयू में रहते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप लगा था। जिस पर जांच हुई थी। करीब 6 महीने पहले केजीएमयू कार्यपरिषद ने उन्हें इस मामले से मुक्त कर दिया था।
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