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दुनिया ने युद्ध दिया, भारत ने बुद्ध : जयवीर
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लखनऊ। भारत विश्व में शांति का उपदेश देने वाले बुद्ध की धरती है। सदियों से दुनिया ने युद्ध दिया, लेकिन भारत ने बुद्ध। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के 41वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शुक्रवार को आयोजित बौद्ध धम्म सम्मेलन में मुख्य अतिथि संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने ये बातें कहीं। कार्यक्रम में देशभर से बौद्ध धर्म के अनुयायी शामिल हुए।
मंत्री ने कहा कि सभी भगवान बुद्ध के करुणा, मैत्री व क्षमा के सिद्धांत पर चलें। इस संदेश को विश्वभर में फैलाया जा रहा है। अवसर पर डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल की पुस्तक ‘सार्वभौमिक बुद्ध’ व ‘51 जातक कथाएं’ का विमोचन भी किया गया।
संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि चित्रकला प्रतियोगिता में स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया। शिविर में लोगों ने निशुल्क जांच कराई। दूसरे सत्र में भजन संध्या हुई। कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल, बाबूराम आचार्य, संस्थान के उपाध्यक्ष विश्वनाथ शामिल हुए।
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जयवीर सिंह ने कहा, महाकुंभ में भी बौद्ध भिक्षुओं ने समाजसेवा का काम किया। विकसित भारत का सपना 2047 तक तब पूरा होगा जब युवा क्षमतावान व चरित्रवान बनें। हर व्यक्ति में यह भावना होनी चाहिए कि राष्ट्र सर्वोपरि है। हरगोबिंद बौद्ध ने बताया कि महाकुंभ में 25 दिन कैंप लगाकर बौद्ध धर्म से संबंधित एक लाख पुस्तकें बांटी गईं।
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मंत्री ने कहा कि सभी भगवान बुद्ध के करुणा, मैत्री व क्षमा के सिद्धांत पर चलें। इस संदेश को विश्वभर में फैलाया जा रहा है। अवसर पर डॉ. प्रमोद कुमार अग्रवाल की पुस्तक ‘सार्वभौमिक बुद्ध’ व ‘51 जातक कथाएं’ का विमोचन भी किया गया।
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संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि चित्रकला प्रतियोगिता में स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया। शिविर में लोगों ने निशुल्क जांच कराई। दूसरे सत्र में भजन संध्या हुई। कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल, बाबूराम आचार्य, संस्थान के उपाध्यक्ष विश्वनाथ शामिल हुए।
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जयवीर सिंह ने कहा, महाकुंभ में भी बौद्ध भिक्षुओं ने समाजसेवा का काम किया। विकसित भारत का सपना 2047 तक तब पूरा होगा जब युवा क्षमतावान व चरित्रवान बनें। हर व्यक्ति में यह भावना होनी चाहिए कि राष्ट्र सर्वोपरि है। हरगोबिंद बौद्ध ने बताया कि महाकुंभ में 25 दिन कैंप लगाकर बौद्ध धर्म से संबंधित एक लाख पुस्तकें बांटी गईं।