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Lucknow News: बेजोड़ है लखनऊ की खस्ता कचौड़ी का स्वाद

Tue, 04 Nov 2025 02:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 04 Nov 2025 02:07 AM IST
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The taste of Lucknow's crispy shortbread is unmatched.
हजरतगंज ​स्थित बाजपेई कचौड़ी भंडार। -अमर उजाला
लखनऊ। खानपान की बात करें तो शहर में नॉनवेज के अलावा भी बहुत से व्यंजन ऐसे हैं जिनकी लज्जत की शोहरत लखनऊ की सरहद पार कर देश-विदेश तक पहुंच चुकी है। इनमें से एक है यहां की मशहूर खस्ता कचौड़ी। देशी घी और खास मसालों का मिश्रण इन्हें स्वाद में लाजवाब बनाता है। खस्ता कचौड़ी के कुछ प्रतिष्ठान 90 साल पुराने हैं तो कोई 50 वर्ष पुराने, लेकिन इनकी लज्जत आज भी बरकरार है। आज भी इनके यहां खाने के शौकीनों की भीड़ लगती है।
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यहां की खास खस्ता कचौड़ी का जिक्र पर्यटन निदेशालय की ओर से भेजी गई उस रिपोर्ट में भी किया गया जिसके आधार पर यूनेस्को की क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी में लखनवी खानपान को जगह मिली। हजरतगंज के नवल किशोर रोड पर अगर किसी खानपान की दुकान पर शौकीनों की लंबी कतार दिखाई दे तो समझ जाइए कि यही बाजपेई कचौड़ी की दुकान है। वहीं पर चटपटी खुशबूदार मसालेदार वाली सब्जी के साथ मुलायमियत भरी दाल की कचौड़ी खाते लोग दिनभर दिखाई दे जाएंगे। 1974 में बालकृष्ण बाजपेई ने स्वाद के इस खजाने की शुरुआत की थी। इसके बाद उनकी बाद की पीढि़यों ने इसे आगे बढ़ाया।
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कचौड़ियों के साथ ही इसके साथ मिलने वाली सब्जी ऐसी है कि जो लोग कम तीखा खाते हैं, वे भी चटखारे लेकर इसे चट कर जाते हैं। दुकान मालिक मनीष बाजपेई ने बताया कि कचौड़ियों में दालों के साथ ही मसाले और सब्जी में कुछ विशेष मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। हमारा उद्देश्य है कि खाने के शौकीनों को निराश न लौटना पड़े। इसके अलावा शहर में खस्ते श्री की कचौड़ी और दुर्गा की कचौड़ी भी खूब मशहूर हैं।
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नेतराम की कचौड़ी और रत्ती के खस्ते हैं खास

अमीनाबाद में 1935 में नेतराम ने छोटी सी दुकान से शुरुआत की और आज यहां के स्वाद की शोहरत पूरे देश में फैल चुकी है। देशी घी से बनीं कचौड़ियों के शौकीन दूर-दूर से यहां आते हैं। अफगानी कूफा हींग और सौंफ समेत कई तरह के मसालों का इस्तेमाल इसमें किया जाता है। रत्तीलाल ने 1937 में जिस खस्ता की कचौड़ी का स्वाद लखनवियों की जुबान पर लगाया था, वह आज भी बरकरार है। उन्हीं के नाम से हीवेट रोड पर बड़ी दुकान पर खस्ता कचौड़ी खाने के लिए लोगों की भीड़ रहती है। कचौड़ी के साथ मसालेदार इसे और भी खास बनाते हैं।


फोटो- रश्मि वैद्य ने मारवाड़ी थाली को बनाया लोकप्रिय
यूं तो लखनऊ में अब मारवाड़ी खाना कई रेस्टोरेंट और होटल में मिलने लगा है। सनतकदा फेस्टिवल के जरिये 2009 में खास मारवाड़ी थाली की शुरुआत ऐशबाग निवासी रश्मि वैद्य ने की। उन्होंने बताया कि जब मैं शादी के बाद 1975 में लखनऊ आई तब यहां मारवाड़ी खाने के लिए कोई खास जगह नहीं थी। केवल मारवाड़ी परिवारों में ही यह खाना मिलता था। 2009 में सनतकदा फेस्टिवल में मैंने इसे शुरू किया और धीरे-धीरे यह लोकप्रिय होता गया। उन्होंने बताया कि उनकी खास थाली में मारवाड़ी व्यंजनों में सांगर का साग, गट्टा, कांजी वड़ा, दाल की पूड़ी, फोगला, दाल की मंगौड़ी और तिकड़िया रहते हैं।

हजरतगंज स्थित बाजपेई कचौड़ी भंडार। -अमर उजाला

हजरतगंज स्थित बाजपेई कचौड़ी भंडार। -अमर उजाला

हजरतगंज स्थित बाजपेई कचौड़ी भंडार। -अमर उजाला

हजरतगंज स्थित बाजपेई कचौड़ी भंडार। -अमर उजाला

हजरतगंज स्थित बाजपेई कचौड़ी भंडार। -अमर उजाला

हजरतगंज स्थित बाजपेई कचौड़ी भंडार। -अमर उजाला

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