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खुला नाला, बंद जिम्मेदारी : सुरेश की मौत के 72 घंटे बाद भी नहीं जागा सिस्टम

Tue, 15 Jul 2025 02:10 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jul 2025 02:10 AM IST
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The system has not woken up even 72 hours after Suresh's death
परिजनों से मिलने पहुंचे अजय राय।
लखनऊ। ठाकुरगंज में खुले नाले में गिरकर पेंटर सुरेश लोधी की दर्दनाक मौत को 72 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन जिस नाले ने उनकी जान ली, उसे अब तक नगर निगम ढक नहीं सका है। एक जिंदगी खत्म हो गई, तीन बच्चों के सपने टूट गए, एक पत्नी विधवा हो गई और सिस्टम अब भी खामोश है।
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मृतक पेंटर सुरेश के घर पर सोमवार को भी जमावड़ा लगा रहा, जहां लोग नगर निगम की लापरवाही की बातें करते रहे। लोग कह रहे थे कि सुरेश लोधी कोई बड़ी शख्सियत नहीं थे। वह आम इंसान थे, जो अपने बच्चों को पढ़ा-लिखाकर बेहतर भविष्य देना चाहते थे, मगर लापरवाह व्यवस्था और खुले सिस्टम ने उनके सपनों को नाले में डुबो दिया। आंखों में आंसू भरे हुए उनकी पड़ोसन खूशबू कहती हैं, सुरेश बच्चों को पढ़ाकर बड़ा आदमी बनाना चाहते थे, लेकिन बच्चों के सपने भी शायद उसी नाले में बह गए।
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लोग डरे, बच्चों को बाहर जाने से रोक रहे

खुले नाले को देखकर यही लग रहा है, मानो जिम्मेदारों को कोई सीख ही न मिली हो, कोई सबक न लिया गया हो। स्थानीय लोग डरे हुए हैं। वे बच्चों को अकेले बाहर जाने से रोक रहे हैं। उन्हें आशंका है कि नगर निगम की लापरवाही कहीं उन पर भारी न पड़ पाए।
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कांग्रेस ने उठाई मदद की मांग

सोमवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सरकार से मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की। उन्होंने कहा कि नगर निगम की यह घोर लापरवाही और प्रशासन की बेरुखी बेहद शर्मनाक है।


प्रशासन की बेरुखी...लाठियां और आंसू

लोगों में गुस्सा इस बात की भी दिखी कि सुरेश के परिजनों और स्थानीय लोगों ने जब न्याय की मांग की, तो बदले में उन्हें लाठीचार्ज मिला। शनिवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल का प्रयोग किया और सुरेश के लिए आवाज उठाने वालों पर डंडे बरसाए। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष आर्यन मिश्रा भी पुलिस की बदसलूकी और मारपीट का शिकार हुए। उन्होंने कहा, यह पहली बार नहीं है, जब प्रशासन ने सवाल उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश की है।
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