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Lucknow News: 12 साल की उम्र में लापता बेटा 22 साल बाद लौटा घर, खुशी से रो पड़े मां-बाप
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गांव में माता-पिता के साथ युवक।
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निगोहां, लखनऊ। निगोहां गांव के राजमिस्त्री रामेश्वर के घर में दीवाली जैसा माहौल है। हो भी क्यों नहीं, 12 साल की उम्र में जो बेटा दिल्ली में लापता हो गया था वह 22 साल बाद घर जो लौटा है। बेटे को वापस देखने की उम्मीद में थक चुकी उम्मीद को नई रोशनी मिलने के बाद बुजुर्ग माता पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं।
22 साल पहले दिल्ली से लापता हुआ रामेश्वर का बेटे सोनू को देखने के लिए गांव के लोगों की लाइन लगी है। हर कोई सोनू से मिलने रामेश्वर के घर जा रहा है। रामेश्वर उर्फ टिन्ना पत्नी चंद्रकली, बेटे राजेंद्र, सोनू व मोनू और तीन बेटियों सरिता, सविता व शिल्पी के साथ रहते थे। कुछ वर्ष पूर्व छोटी बेटी शिल्पी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। रामेश्वर ने बताया कि मझला बेटा सोनू 12 साल की उम्र में चाचा हरिश्चंद्र के साथ दिल्ली गया था, जहां से वह लापता हो गया था। सोनू की दिल्ली में ही गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। सालों बीतने के बाद परिजनों ने सोनू के वापस आने की उम्मीद ही खो दी थी। इसी बीच रविवार को सोनू निगोहां गांव पहुंचा। गांव की गलियों में अपना घर ढूंढते हुए पहुंचा तो उसका पुराना मकान गिरा मिला। यह देखकर वह रोने लगा। पूछने पर गांव वालों को पूरी बात बताई। इसके बाद गांव वाले उसे माता पिता के नए मकान में ले गए।
माता-पिता ने पहले पहचानने से किया इन्कार
सोनू ने घर जाकर माता-पिता से परिचय दिया तो उन्होंने पहचानने से इन्कार कर दिया। सोनू कुछ पुराने कपड़े लेकर आया था, जिसे उसने माता-पिता को दिया और बाग की तरफ चला गया। परिजनों ने कुछ लोगों को भेजकर उसे वापस बुलाया। इसके बाद रामेश्वर ने सोनू से कहा कि कैसे यकीन करें तुम मेरे बेटे हो। इसपर सोनू ने बचपन के किस्से बताए। इसके बाद माता-पिता भावुक हो गए और उसे गले से लगा लिया। सोनू ने बताया कि वह मुंबई पहुंच गया था, जहां उसे एक बुजुर्ग महिला ने सहारा दिया था। महिला की मौत के बाद उसे घर की याद आने लगी और वह वापस चला आया।
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22 साल पहले दिल्ली से लापता हुआ रामेश्वर का बेटे सोनू को देखने के लिए गांव के लोगों की लाइन लगी है। हर कोई सोनू से मिलने रामेश्वर के घर जा रहा है। रामेश्वर उर्फ टिन्ना पत्नी चंद्रकली, बेटे राजेंद्र, सोनू व मोनू और तीन बेटियों सरिता, सविता व शिल्पी के साथ रहते थे। कुछ वर्ष पूर्व छोटी बेटी शिल्पी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। रामेश्वर ने बताया कि मझला बेटा सोनू 12 साल की उम्र में चाचा हरिश्चंद्र के साथ दिल्ली गया था, जहां से वह लापता हो गया था। सोनू की दिल्ली में ही गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। सालों बीतने के बाद परिजनों ने सोनू के वापस आने की उम्मीद ही खो दी थी। इसी बीच रविवार को सोनू निगोहां गांव पहुंचा। गांव की गलियों में अपना घर ढूंढते हुए पहुंचा तो उसका पुराना मकान गिरा मिला। यह देखकर वह रोने लगा। पूछने पर गांव वालों को पूरी बात बताई। इसके बाद गांव वाले उसे माता पिता के नए मकान में ले गए।
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माता-पिता ने पहले पहचानने से किया इन्कार
सोनू ने घर जाकर माता-पिता से परिचय दिया तो उन्होंने पहचानने से इन्कार कर दिया। सोनू कुछ पुराने कपड़े लेकर आया था, जिसे उसने माता-पिता को दिया और बाग की तरफ चला गया। परिजनों ने कुछ लोगों को भेजकर उसे वापस बुलाया। इसके बाद रामेश्वर ने सोनू से कहा कि कैसे यकीन करें तुम मेरे बेटे हो। इसपर सोनू ने बचपन के किस्से बताए। इसके बाद माता-पिता भावुक हो गए और उसे गले से लगा लिया। सोनू ने बताया कि वह मुंबई पहुंच गया था, जहां उसे एक बुजुर्ग महिला ने सहारा दिया था। महिला की मौत के बाद उसे घर की याद आने लगी और वह वापस चला आया।
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