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योगी सरकार के दूसरे बजट की तैयारी शुरू, चुनावी वादों पर रहेगा जोर

Thu, 28 Sep 2017 12:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 28 Sep 2017 12:42 PM IST
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The second budget of cm yogi adityanath will be based on election promises
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पहले बजट में किसानों की कर्जमाफी के भार तले दबी योगी आदित्यनाथ सरकार 2018-19 के बजट की तैयारी में जुट गई है। इंटरमीडिएट उत्तीर्ण विद्यार्थियों को लैपटॉप देने सहित कई बड़े बजट वाले चुनावी वादे अभी अधूरे हैं।

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योगी सरकार नए बजट में तमाम वादे पूरी करती नजर आएगी। विभागों को सरकार की प्राथमिकताओं और प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखकर बजट प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।
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सरकार ने बजट के जरिए प्रदेश का प्रगतिशील चेहरा पेश करने का निर्देश दिया है। विभागों से 30 नवंबर तक बजट प्रस्ताव मांगे गए हैं।
 
प्रमुख सचिव वित्त एवं वित्त आयुक्त संजीव मित्तल ने बुधवार को 2018-19 की बजट तैयारियों को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए।

इसमें एकमुश्त बजट प्रावधान न करने, प्राप्तियों और खर्चों के अनुमान का यथार्थपरक आकलन करने, नए निर्माण कार्यों के लिए बजट व्यवस्था करने के पहले अधूरे कार्यों के लिए बजट व्यवस्था करने, संविदा के आधार पर कर्मचारियों को नियुक्त करने की जगह कार्य को ही संविदा के आधार पर कराने के साथ ही फिजूलखर्ची पर रोक लगाने और अनुत्पादक खर्चों में कमी लाने को कहा गया है।
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बजट में प्रतीक प्रावधान न करने, अनुपयोगी योजनाओं को समाप्त करने, नई गाड़ियों की खरीद न करने, जहां तक संभव हो नए पदों के सृजन के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। नए आवासीय व अनावासीय भवनों के निर्माण का प्रस्ताव विशेष परिस्थितियों को छोड़कर न भेजने को कहा है।

अनावश्यक उपकरणों की खरीद पर खास हिदायत

सरकार ने कुछ विभागों द्वारा काफी संख्या में मशीनें व उपकरण अनावश्यक रूप से खरीदने का संज्ञान लिया है। उपयोग न होने के कारण तमाम मशीनें व उपकरण बेकार हो जाते हैं।

इससे इन सामानों की खरीद पर किया खर्च अनुपयोगी साबित होता है। सरकार ने हिदायत दी है कि मुख्यालयों व अधीनस्थ कार्यालयों में उपलब्ध मशीनों, उपकरणों व साज-सज्जा की सामग्रियों की अपडेटेड सूची तैयार की जाए। सबसे पहले इनका उपयोग सुनिश्चित किया जाए, इसके बाद ही इससे नए प्रस्तावों पर विचार किया जाए।

इनका भी रखें ध्यान

  • स्टाफ पर खर्च अधिक बढ़ने पर प्रशासनिक ढांचे का पुनर्गठन किया जाए।
  • डिलीवरी सिस्टम और पर्यवेक्षण पर खर्च की समीक्षा की जाए।
  • सब्सिडी की समीक्षा की जाए, इसके बाद ही बजट अनुमान तय करें।
  • ऐसे कामों का चयन न किया जाए जिन्हें कांट्रैक्ट के आधार पर कराया जा सकता है।
  • वेतन व महंगाई भत्ते के लिए बजट स्वीकृत पदों के बजाय भरे हुए पदों पर मांगें।
  • प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के स्वरूप में आवश्यक परिवर्तन कर वाह्य सहायता,  केंद्रीय सहायता व नाबार्ड से पोषित परियोजनाओं के लिए अधिक से अधिक राशि लेने के प्रयास किए जाएं।
  • योजनाओं का मूल्यांकन वैल्यू फॉर मनी के आधार पर किया जाए।
  • समान उद्देश्यों वाली योजनाओं की बहुतायत नहीं होनी चाहिए।
  • कार्यक्रम या योजना का इस तरह मूल्यांकन हो कि उस पर होने वाले खर्च के मुकाबले किस सीमा तक आर्थिक व सामाजिक लाभ मिलेगा? 
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