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Lucknow News: राजधानी में हेपेटाइटिस बी-सी का खतरा बढ़ा, 2237 रोगी मिले
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लखनऊ। राजधानी में हेपेटाइटिस बी-सी का खतरा बढ़ता जा रहा है। संक्रमण के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी सामने आई है। बीते दस माह के दौरान शहर में दो हजार से अधिक लोग हेपेटाइटिस बी व सी से संक्रमित मिले हैं। इतने बड़े स्तर पर संक्रमण मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अब तक इसके फैलने की वजह तलाश नहीं पाया है। पॉजिटिव मिलने के बाद इन मरीजों का इलाज केजीएमयू, लोकबंधु अस्पताल में खुले केंद्र से चल रहा है।
रहीमाबाद के मुशीखेड़ा ही नहीं बल्कि पूरे शहर में हेपेटाइटिस बी-सी का संक्रमण फैला है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों और संस्थानों में हुई जांच के दौरान बड़ी संख्या में मरीजों में हेपेटाइटिस बी और सी की पुष्टि हुई है। बीते वर्ष अप्रैल से फरवरी 2026 तक 2,237 रोगी संक्रमित मिले हैं। इसमें 1169 हेपेटाइटिस बी और 1068 हेपेटाइटिस सी से संक्रमित मिले। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित खून, असुरक्षित इंजेक्शन, दूषित मेडिकल उपकरणों के इस्तेमाल से फैलती है। चिंता की बात यह है कि बढ़ते मामलों के बावजूद विभाग अब तक संक्रमण के मुख्य स्रोत की पहचान नहीं कर पाया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संभावित कारणों की जांच की जा रही है। लोगों को सुरक्षित इंजेक्शन, जांच के दौरान सावधानी और जागरूकता अपनाने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, सुरक्षित रक्त संक्रमण और मेडिकल उपकरणों के स्वच्छ उपयोग से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके साथ ही लोगों को नियमित जांच कराने और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेने की भी सलाह दी जा रही है।
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जिले में दो हेपेटाइटिस उपचार केंद्र
राजधानी में हेपेटाइटिस बी-सी के इलाज के लिए दो केंद्र खुले हैं जहां जांच, वायरल लोड परीक्षण व दवा का वितरण किया जा रहा है। इसमें लोकबंधु अस्पताल में हर दिन दो से तीन मरीज पॉजिटिव आते हैं। वहीं, केजीएमयू में यह आंकड़ा अधिक है। पॉजिटिव आने पर उन्हें केंद्र पर पंजीकृत करके इलाज किया जाता है।
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हेपेटाइटिस बी-सी के दो हजार से अधिक मामले सामने आए हैं जिसमें कई मरीजों का इलाज पूरा हो चुका है। कुछ मरीज अभी केंद्र से दवाएं ले रहे हैं। संक्रमण फैलने की वजह तलाशी जा रही है। - डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ
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रहीमाबाद के मुशीखेड़ा ही नहीं बल्कि पूरे शहर में हेपेटाइटिस बी-सी का संक्रमण फैला है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों और संस्थानों में हुई जांच के दौरान बड़ी संख्या में मरीजों में हेपेटाइटिस बी और सी की पुष्टि हुई है। बीते वर्ष अप्रैल से फरवरी 2026 तक 2,237 रोगी संक्रमित मिले हैं। इसमें 1169 हेपेटाइटिस बी और 1068 हेपेटाइटिस सी से संक्रमित मिले। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित खून, असुरक्षित इंजेक्शन, दूषित मेडिकल उपकरणों के इस्तेमाल से फैलती है। चिंता की बात यह है कि बढ़ते मामलों के बावजूद विभाग अब तक संक्रमण के मुख्य स्रोत की पहचान नहीं कर पाया है।
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स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संभावित कारणों की जांच की जा रही है। लोगों को सुरक्षित इंजेक्शन, जांच के दौरान सावधानी और जागरूकता अपनाने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, सुरक्षित रक्त संक्रमण और मेडिकल उपकरणों के स्वच्छ उपयोग से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके साथ ही लोगों को नियमित जांच कराने और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेने की भी सलाह दी जा रही है।
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जिले में दो हेपेटाइटिस उपचार केंद्र
राजधानी में हेपेटाइटिस बी-सी के इलाज के लिए दो केंद्र खुले हैं जहां जांच, वायरल लोड परीक्षण व दवा का वितरण किया जा रहा है। इसमें लोकबंधु अस्पताल में हर दिन दो से तीन मरीज पॉजिटिव आते हैं। वहीं, केजीएमयू में यह आंकड़ा अधिक है। पॉजिटिव आने पर उन्हें केंद्र पर पंजीकृत करके इलाज किया जाता है।
हेपेटाइटिस बी-सी के दो हजार से अधिक मामले सामने आए हैं जिसमें कई मरीजों का इलाज पूरा हो चुका है। कुछ मरीज अभी केंद्र से दवाएं ले रहे हैं। संक्रमण फैलने की वजह तलाशी जा रही है। - डॉ. एनबी सिंह, सीएमओ