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Lucknow News: अपने ऑफिस के पास से ही अतिक्रमण नहीं हटा पा रहे जिम्मेदार
Sun, 25 May 2025 01:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 25 May 2025 01:33 AM IST
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लालबाग में त्रिलोकनाथ रोड पर नगर निगम का मुख्यालय है। इसके दाएं-बाएं दोनों ओर मेन रोड पर ही अतिक्रमण है। सड़क पर ही कार गैराज चल रहे हैं। भोपाल हाउस पार्क के दोनों ओर की सड़क पर कब्जा है। चाय और खाने की दुकान वालों ने आधी सड़क घेर ली है।
कैसरबाग में जिलाधिकारी कार्यालय के गेट के पास तक फुटपाथ पर दोनों ओर कब्जे हैं। टिनशेड डालकर और दरवाजा लगाकर लोगों ने ऑफिस बना लिए हैं। करीब तीन साल पहले स्मार्ट सिटी में करोड़ों रुपये खर्च कर यहां फुटपाथ और सड़क बनाई गई थी। सड़क पर दोनों ओर अवैध पार्किंग भी हो रही है।
महात्मा गांधी मार्ग पर मंडलायुक्त कार्यालय के बाहर गेट को छोड़ पूरी बाउंड्री के आगे कब्जा रहता है। ऐसा लगता है कि कार्यालय के बाहर की सड़क पार्किंग स्टैंड हो। शहर की मेन रोड होने के कारण इस पर दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है। ऐसे में हर दिन यहां पर चौड़ी सड़क पतली गली नजर आती है। यहां का फुटपाथ भी स्मार्ट सिटी योजना में बनाया गया है।
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लालबाग के वाल्मीकि मार्ग पर हजरतगंज कोतवाली है। उसके पास में फायर स्टेशन है। आग लगने पर यहां से गाड़ियां रवाना की जाती हैं, लेकिन सड़क की दोनों पटरियों पर कार गैराज चलते हैं। पुरानी खराब गाड़ियां तो हमेशा खड़ी रहती हैं। चाट, चाय और पूड़ी के ठेले पर भी यहां पर लगते हैं। सड़क काफी चौड़ी है, इसके बावजूद यहां से निकलना आसान नहीं।
लखनऊ। शहर के प्रमुख इलाकों में स्थित नगर निगम, डीएम ऑफिस, मंडलायुक्त ऑफिस और हजरतगंज कोतवाली के पास ही अतिक्रमण है। ये उन अफसरों के दफ्तर हैं, जिन पर पूरे शहर से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी है। अतिक्रमण के कारण यहां पर आवागमन बाधित रहता है। उसके बाद भी कब्जे नहीं हट पा रहे हैं। शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के सभी दावे कागजी नजर आते हैं। सुधार के लिए होने वाली बैठकों का हश्र यहां के हालात देखकर पता चलता है।
बीते सप्ताह भी ऐसी बैठक मंडलायुक्त कार्यालय में हुई। पुलिस आयुक्त, महापौर और सांसद राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि सहित तमाम जिम्मेदार लोग शामिल रहे। सभी ने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने की बात कही। अतिक्रमण न हट पाने को लेकर महापौर ने पुलिस पर सवाल भी उठाया। कहा कि नगर निगम अतिक्रमण हटवाता है, लेकिन दोबारा न हो, यह पुलिस की जिम्मेदारी है। उसके बाद भी अतिक्रमण हो जाता है। इस बैठक से पहले इसी तरह की एक बैठक बीते साल महापौर सुषमा खर्कवाल ने बुलाई थी। यह बैठक लालबहादुर शास्त्री मार्ग स्थित जल निगम के फील्ड हाॅस्टल के सभागार में हुई थी। मंडलायुक्त और पुलिस आयुक्त नहीं पहुंचे थे। तब भी शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने का मुद्दा उठा था, लेकिन सब कागज पर रह गया। कागजी खानापूरी को लेकर अतिक्रमण अभियान तो चलते हैं, मगर कब्जे फिर हो जाते हैं।
वर्जन
सड़क पटरी से कब्जे हटाने के लिए लगातार अभियान चल रहा है। इस बारे में जोनल अधिकारी को निर्देश भी दिए जाते हैं। अभियान के लिए पुलिस को भी सूचना दी जाती है। जरूरी ये है कि अतिक्रमण हटाने के बाद दूसरे विभाग भी जिम्मेदारी समझकर उन्हें लगने न दें।
ललित कुमार, अपर नगर आयुक्त
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कैसरबाग में जिलाधिकारी कार्यालय के गेट के पास तक फुटपाथ पर दोनों ओर कब्जे हैं। टिनशेड डालकर और दरवाजा लगाकर लोगों ने ऑफिस बना लिए हैं। करीब तीन साल पहले स्मार्ट सिटी में करोड़ों रुपये खर्च कर यहां फुटपाथ और सड़क बनाई गई थी। सड़क पर दोनों ओर अवैध पार्किंग भी हो रही है।
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महात्मा गांधी मार्ग पर मंडलायुक्त कार्यालय के बाहर गेट को छोड़ पूरी बाउंड्री के आगे कब्जा रहता है। ऐसा लगता है कि कार्यालय के बाहर की सड़क पार्किंग स्टैंड हो। शहर की मेन रोड होने के कारण इस पर दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है। ऐसे में हर दिन यहां पर चौड़ी सड़क पतली गली नजर आती है। यहां का फुटपाथ भी स्मार्ट सिटी योजना में बनाया गया है।
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लालबाग के वाल्मीकि मार्ग पर हजरतगंज कोतवाली है। उसके पास में फायर स्टेशन है। आग लगने पर यहां से गाड़ियां रवाना की जाती हैं, लेकिन सड़क की दोनों पटरियों पर कार गैराज चलते हैं। पुरानी खराब गाड़ियां तो हमेशा खड़ी रहती हैं। चाट, चाय और पूड़ी के ठेले पर भी यहां पर लगते हैं। सड़क काफी चौड़ी है, इसके बावजूद यहां से निकलना आसान नहीं।
लखनऊ। शहर के प्रमुख इलाकों में स्थित नगर निगम, डीएम ऑफिस, मंडलायुक्त ऑफिस और हजरतगंज कोतवाली के पास ही अतिक्रमण है। ये उन अफसरों के दफ्तर हैं, जिन पर पूरे शहर से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी है। अतिक्रमण के कारण यहां पर आवागमन बाधित रहता है। उसके बाद भी कब्जे नहीं हट पा रहे हैं। शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के सभी दावे कागजी नजर आते हैं। सुधार के लिए होने वाली बैठकों का हश्र यहां के हालात देखकर पता चलता है।
बीते सप्ताह भी ऐसी बैठक मंडलायुक्त कार्यालय में हुई। पुलिस आयुक्त, महापौर और सांसद राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि सहित तमाम जिम्मेदार लोग शामिल रहे। सभी ने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने की बात कही। अतिक्रमण न हट पाने को लेकर महापौर ने पुलिस पर सवाल भी उठाया। कहा कि नगर निगम अतिक्रमण हटवाता है, लेकिन दोबारा न हो, यह पुलिस की जिम्मेदारी है। उसके बाद भी अतिक्रमण हो जाता है। इस बैठक से पहले इसी तरह की एक बैठक बीते साल महापौर सुषमा खर्कवाल ने बुलाई थी। यह बैठक लालबहादुर शास्त्री मार्ग स्थित जल निगम के फील्ड हाॅस्टल के सभागार में हुई थी। मंडलायुक्त और पुलिस आयुक्त नहीं पहुंचे थे। तब भी शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने का मुद्दा उठा था, लेकिन सब कागज पर रह गया। कागजी खानापूरी को लेकर अतिक्रमण अभियान तो चलते हैं, मगर कब्जे फिर हो जाते हैं।
वर्जन
सड़क पटरी से कब्जे हटाने के लिए लगातार अभियान चल रहा है। इस बारे में जोनल अधिकारी को निर्देश भी दिए जाते हैं। अभियान के लिए पुलिस को भी सूचना दी जाती है। जरूरी ये है कि अतिक्रमण हटाने के बाद दूसरे विभाग भी जिम्मेदारी समझकर उन्हें लगने न दें।
ललित कुमार, अपर नगर आयुक्त