प्राइवेट प्रैक्टिस करते मिले तो डॉक्टरों के साथ नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन भी होगा निरस्त
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सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए पाए गए तो उनका पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। यही नहीं उस नर्सिंग होम का भी लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा, जहां सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते मिलेंगे। शासन ने राजकीय अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक बार फिर निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश जारी किया है।
सरकारी डॉक्टरों व राजकीय एलोपैथिक चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने बताया कि सरकारी चिकित्सकों के निजी प्रैक्टिस करने की शिकायतें व सूचनाएं लगातार शासन को मिल रही हैं। इसे शासन ने गंभीरता से लिया है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि इसकी पुष्टि होने पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से उसका पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति की जाएगी। चिकित्सक को भुगतान किए गए नॉन प्रैक्टिस अलाउंस की वसूली भी की जाएगी। इसके अलावा प्राइवेट प्रैक्टिस से कमाए गए धन पर इनकम टैक्स दिया है कि नहीं इसकी भी जांच होगी। प्रमुख सचिव ने बताया कि निजी प्रैक्टिस रोकने के प्रचार-प्रसार के लिए जारी भी निर्देशों को जिलाधिकारी कार्यालय, सरकारी अस्पतालों में होर्डिंग लगाकर प्रदर्शित किया जाएगा।
ये है शासनादेश
यूपी में सरकारी चिकित्सकों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस करना प्रतिबंधित है। इसके लिए बाकायदा 28 फरवरी 1978 से प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के सभी पद नॉन प्रैक्टिसिंग किए गए हैं। सरकारी डॉक्टर एलोपैथिक प्राइवेट प्रैक्टिस पर निर्बन्धन नियमावली 1983 यथा संशोधित नियमावली 2003 में निजी प्रैक्टिस को प्रतिबंधित किया गया है।
इसका उल्लंघन करने पर चिकित्सा अधिकारियों को दुराचरण का दोषी माना गया है। हाईकोर्ट ने भी राजकीय चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध को पूरी तरह से वैध ठहराया है।