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Lucknow News: जर्जर और जंग लगे पिलर्स पर टिके हैं यात्री शेड
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चारबाग स्टेशन पर जंग लगे पिलर और जर्जर शेड।
लखनऊ। चारबाग रेलवे स्टेशन पर यात्री शेड पुराने, जर्जर व जंग लगे पिलर्स पर टिके हुए हैं। ऐसे में हादसों की आशंका लगातार बनी हुई है। स्टेशन पर कई पिलर्स व बीम को तत्काल बदलवाने की आवश्यकता है।
शुक्रवार को चारबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफाॅर्म पांच पर यात्री शेड भरभराकर गिर गया था। इसमें एक टीटीई व दो यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद से ही अन्य शेडों पर सवाल उठने लगे। पता चला कि स्टेशन पर जो भी यात्री शेड हैं, वे जर्जर व जंग लगे हुए हैं। ब्रिज वर्कशाॅप को इनकी जांच व निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने प्लेटफाॅर्म दो, तीन, चार, पांच पर पावर ब्लाॅक लेकर ट्रेनों को अन्य प्लेटफार्माें पर शिफ्ट कर दिया है।
बार-बार बदलते रहे माॅडल, अपग्रेडेशन सुस्त
रेलवे स्टेशन पर अपग्रेडेशन का काम करीब पांच साल पहले पूरा कर लिया जाना चाहिए था, लेकिन बार-बार नक्शा ही बदला जाता रहा। साथ ही स्टेशन निर्माण के लिए पहले बिल्ट, ऑपरेट, ट्रांसफर माॅडल अपनाया गया। इसके बाद काॅलोनियों के कॉमर्शियल इस्तेमाल से होने वाली कमाई से निर्माण की योजना बनी और अंत में पीपीपी माॅडल अपनाया गया। यही वजह है कि अपग्रेडेशन का काम महज 35 प्रतिशत ही हो सका है।
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सात दिन में बनेगी रिपोर्ट
जीएम राजेश कुमार पांडेय ने हादसे के बाद जांच समिति गठित की थी। इसमें सेफ्टी व इंजीनियरिंग आदि से जुड़े अफसर हैं। इन्होंने कर्मचारियों से पूछताछ शुरू कर दी है। सूत्र बताते हैं कि हफ्तेभर में रिपोर्ट तैयार कर महाप्रबंधक को साैंपी जाएगी।
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शुक्रवार को चारबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफाॅर्म पांच पर यात्री शेड भरभराकर गिर गया था। इसमें एक टीटीई व दो यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद से ही अन्य शेडों पर सवाल उठने लगे। पता चला कि स्टेशन पर जो भी यात्री शेड हैं, वे जर्जर व जंग लगे हुए हैं। ब्रिज वर्कशाॅप को इनकी जांच व निरीक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने प्लेटफाॅर्म दो, तीन, चार, पांच पर पावर ब्लाॅक लेकर ट्रेनों को अन्य प्लेटफार्माें पर शिफ्ट कर दिया है।
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बार-बार बदलते रहे माॅडल, अपग्रेडेशन सुस्त
रेलवे स्टेशन पर अपग्रेडेशन का काम करीब पांच साल पहले पूरा कर लिया जाना चाहिए था, लेकिन बार-बार नक्शा ही बदला जाता रहा। साथ ही स्टेशन निर्माण के लिए पहले बिल्ट, ऑपरेट, ट्रांसफर माॅडल अपनाया गया। इसके बाद काॅलोनियों के कॉमर्शियल इस्तेमाल से होने वाली कमाई से निर्माण की योजना बनी और अंत में पीपीपी माॅडल अपनाया गया। यही वजह है कि अपग्रेडेशन का काम महज 35 प्रतिशत ही हो सका है।
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सात दिन में बनेगी रिपोर्ट
जीएम राजेश कुमार पांडेय ने हादसे के बाद जांच समिति गठित की थी। इसमें सेफ्टी व इंजीनियरिंग आदि से जुड़े अफसर हैं। इन्होंने कर्मचारियों से पूछताछ शुरू कर दी है। सूत्र बताते हैं कि हफ्तेभर में रिपोर्ट तैयार कर महाप्रबंधक को साैंपी जाएगी।

चारबाग स्टेशन पर जंग लगे पिलर और जर्जर शेड।

चारबाग स्टेशन पर जंग लगे पिलर और जर्जर शेड।

चारबाग स्टेशन पर जंग लगे पिलर और जर्जर शेड।