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बिल्डर की जमीन के लिए दांव पर लगे गरीबों के 40 मकान

Sat, 31 May 2014 08:09 AM IST
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 31 May 2014 08:09 AM IST
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new way to grab the home of poor

गोमतीनगर विस्तार की गोकुल विहार कॉलोनी में बन रही रोड को बिल्डर की जमीन बचाने के लिए टेढ़ा किया जा रहा है, जबकि इससे 40 गरीबों के मकान अधिग्रहण के दायरे में आ जाएंगे।

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ये सारे मकान मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों के हैं। इसलिए एलडीए ने यहां धारा-6 करने पर रोक लगा दी गई थी।

मास्टर प्लान की रोड सीधा रखने की दशा में एक बिल्डर की काफी जमीन जा रही है। अब बिल्डर ने अपनी जमीन बचाने के लिए शासन तक जुगत भिड़ा ली है।

शासन में सचिव आवास पंधारी यादव ने शुक्रवार को तय किया कि एक बार फिर से मौके का निरीक्षण किया। इससे पता चलेगा कि वास्तविकता में मास्टर प्लान की रोड टेढ़ी है या सीधी।
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वहीं गोकुल ग्राम सोसाइटी के लोगों का आरोप है कि, अब बिल्डर अपने रसूख का लाभ लेकर उनको बेघर करने की जुगत में लगा हुआ है।

एलडीए ने गोमती नगर विस्तार में मास्टर प्लान रोड को सीधा किए बिना भूमि अर्जन करने पर इसी महीने रोक लगाई थी। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए जैसे ही फाइल एलडीए सचिव के समक्ष प्रस्तुत की गई।
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तो उन्होंने साफ कर दिया कि, पहले मास्टर प्लान रोड को अर्जन के लेआउट में सीधा किया जाए, उसके बाद ही अर्जन किया जाएगा।

इसके बाद फाइल को नए सिरे संशोधित किया जाना था। मगर यह मामला शासन के पाले में चला गया।

जिससे पूरे मामले की तस्वीर ही बदल गई। गोकुल विहार के लोगों का आरोप है कि एक निजी विकासकर्ता को मदद पहुंचाने के लिए करीब 40 परिवारों को बेघर किया जा रहा है।

एलडीए के अधिकारी निजी बिल्डर को बचा रहे हैं। क्योंकि मास्टर प्लान में उसकी करीब 12 से 15 बीघा जमीन जमीन जा रही है। लोगों ने इस मामले की शिकायत एलडीए उपाध्यक्ष एमपी अग्रवाल से भी की थी।


इस पूरे मामले में गड़बड़ी उजागर होने के बाद एलडीए सचिव ने फाइल को संशोधित करने का प्रस्ताव दिया था। मगर समाधान होने की जगह सीधे शासन ने दखल दे दिया है।

सचिव आवास पंधारी यादव ने इस संबंध में एलडीए अधिकारियों की शुक्रवार को मीटिंग ली।

इसमें प्राधिकरण से सचिव एपी तिवारी, मुख्य नगर नियोजक जेएन रेड़्डी, संयुक्त ग्राम्य एवं नगर नियोजक शेर सिंह, जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

इसमें तय किया गया कि, एक बार फिर से स्थलीय परीक्षण करवाया जाए। उसके बाद ही कोई फैसला करवाया जाए।

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