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Lucknow News: कई राज्यों में फैला है ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर ठगी करने वालों का नेटवर्क

Thu, 24 Jul 2025 01:44 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jul 2025 01:44 AM IST
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The network of fraudsters in the name of online gaming is spread across many states
गुडंबा पुलिस की गिरफ्त ठगी गिरोह के सदस्य। - फोटो : संवाद
लखनऊ। गुडंबा स्थित स्मृति अपार्टमेंट से गिरफ्तार ऑनलाइन गेम में सट्टेबाजी के नाम पर ठगी करने वालों का नेटवर्क काफी बड़ा है। इस गिरोह के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हैं। पकड़े गए गिरोह के सदस्यों को भी अपने सरगना के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता। सारा नेटवर्क चेन के माध्यम से जुड़ा है। हर किसी का काम व उसका कमीशन पहले से तय है।
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इस तरह चलता था सिंडिकेट

आरोपियों ने बताया कि उनके गिरोह में हर व्यक्ति का काम पहले से तय है। किसी को ऑनलाइन ग्राहक फंसाने का काम दिया गया था, तो कोई ठगी की रकम के लिए फर्जी डाक्यूमेंट पर खाते खुलवाने का काम करता था। कोई गरीबों के खाते किराये पर लेकर ठगी की रकम उसमें मंगवाता था। कुछ खास लोग खातों से ठगी की रकम निकालकर सरगना तक पहुंचाने का काम करते थे। इस गिरोह से जुड़े हर व्यक्ति को उसके काम के हिसाब से कमीशन मिलता है।
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छोटे नोट का सीरियल नंबर होता था कोड

ठगी की रकम एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए जालसाज छोटे नोट को कोड की तरह प्रयोग करते थे। रुपये लेकर जाने वाले जालसाज को पांच, 10 या एक रुपये का नोट दिया जाता था। नोट का सीरियल नंबर रकम लेने वाले को पहले ही भेज दिया जाता है। तय जगह पर मुलाकात होने पर जालसाज नोट के सीरियल नंबर का मिलान कर रकम का आदान-प्रदान करते थे। कोड मिलने पर ही रकम एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर होती है।
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लोगों को फंसाने का तरीका

डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह ने बताया कि जालसाज सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर अपनी गेमिंग साइट व ऐप का विज्ञापन पॉपअप के माध्यम से भेजते थे। पॉप अप मेसेज में जिक्र होता था कि लोटस गेमिंग साइट या ऐप पर रुपये लगाकर खेलने से निश्चित मुनाफा मिलेगा। मुनाफे की रकम 24 घंटे के अंदर ही निकाली जा सकती है। पॉपअप मेसेज से जो लोग जाल में फंसते थे जालसाज उसको अपने टेलीग्राम चैनल से जोड़ लेते थे। टेलीग्राम पर ग्राहक को लुभावने ऑफर देकर ज्यादा रुपये लगाने के लिए उकसाते थे। शुरुआत में ग्राहक को छोटी रकम लगाने पर मुनाफा देकर विश्वास जीतते थे। विश्वास बढ़ने पर जब लोग मोटी रकम लगाते तब जालसाज गेम में रुपये हारने की बात कहते हुए उसकी रकम हड़प लेते थे।


कितनों से की ठगी... जालसाजों भी नहीं जानते

डीसीपी ने बताया कि पकड़े गए जालसाज चार माह से लखनऊ में ठगी कर रहे थे। एक दिन में ये लोग लाखों रुपयों का ट्रांजेक्शन करते थे। आरोपियों को खुद इस बात का अंदाजा नहीं है कि अब तक उन लोगों ने कितने लोगों से कितनी रकम ठगी है। अनुमान है कि ठगे गए लोगों की संख्या सैकड़ों और रकम करोड़ों में है। डीसीपी ने बताया कि आरोपियों के पास से मिले मोबाइल, लैपटॉप व टैबलेट में काफी डाटा मौजूद है। पुलिस व साइबर क्राइम की टीम डाटा को खंगाल रही है, जिससे गिरोह के अन्य लोगों का पता चलेगा।
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