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Lucknow News: एसएनए में गूंजी 150 साल पुरानी किराना घराने की सुरमयी परंपरा

Sun, 29 Mar 2026 01:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2026 01:48 AM IST
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The Melodious 150-Year-Old Tradition of the Kirana Gharana Resonated at the SNA.
संगीत नाटक अकादमी में कृष्णींद्र वाडिकर से वार्ता करते एसएनए अध्यक्ष जयंत खोत। स्वयं
लखनऊ। लगभग 150 साल पुराना और शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अपनी अनूठी गायकी के लिए प्रसिद्ध किराना घराना अपनी खास परंपराओं और सुरों की गहराई के कारण आज भी लोकप्रिय है। इसी घराने के मशहूर शास्त्रीय संगीत कलाकार कृष्णेन्द्र वाडिकर शनिवार को गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी पहुंचे।
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इस दौरान उन्होंने वार्ताकार एसएनए के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत के साथ सरल और रोचक तरीके से किराना घराने की खासियतों को सामने रखा। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से आयोजित साक्षात्कार और स्टूडियो रिकॉर्डिंग में इस घराने की गायन परंपरा पर विस्तार से बातचीत हुई। इसके अलावा में राग ललित में इस घराने की प्रसिद्ध बंदिश ''भावंदा यार दा जोबन'' भी प्रस्तुति भी दी।
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चर्चा में बताया गया कि किराना घराने की सबसे बड़ी पहचान आलाप की प्रधानता है। यहां राग की शुरुआत धीमे और गहराई वाले आलाप से होती है, जिससे श्रोता राग के भाव को आसानी से महसूस कर पाते हैं। साथ ही राग के मुख्य स्वरों को बहुत विस्तार से गाया जाता है, जिससे उसकी खूबसूरती और स्पष्ट हो जाती है। स्वरों को लंबा खींचकर गाना और मीड़ का प्रयोग इस घराने की खास शैली मानी जाती है।
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इस कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि किराना घराने में जटिल और सजे-धजे सरगम तानों का विशेष महत्व है। ये तानें गायन को न केवल तकनीकी रूप से मजबूत बनाती हैं, बल्कि सुनने में भी बेहद आकर्षक लगती हैं।


पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, किराना घराना हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अनमोल अध्याय है, जिसने भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व पटल पर नई पहचान दी है। उत्तर प्रदेश सरकार निरंतर ऐसे आयोजनों के माध्यम से हमारी पारंपरिक कला और संगीत को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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