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Lucknow News: देवीगीत से बिरहा तक भोजपुरी लोकगीतों के सजे सुर
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लोकगायन कार्यशाला के समापन समारोह में प्रस्तुतिस देतीं महिलाएं।
लखनऊ। देवी गीत की आराधना, सोहर की खुशी, बिरहा की कसक और निर्गुण के भाव। भोजपुरी लोक संगीत की विविध छटाएं सोमवार को गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सभागार में सुनाई दीं। इमेज एंड क्रिएशन वेलफेयर सोसाइटी की लोकगायन कार्यशाला के समापन समारोह में प्रतिभागियों ने पारंपरिक गीतों की प्रस्तुतियों से लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया। भजन नाहीं जानी कौने बतिया पर खफा रसिया... ने श्रोताओं का खास तौर पर ध्यान खींचा।
उप्र. संस्कृति विभाग के सहयोग से कार्यशाला तीन अक्तूबर से वरिष्ठ भोजपुरी लोकगायक अवधेश कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में चल रही थी। समापन समारोह की शुरुआत देवी गीत अपने बचपन के... से हुई। फिर सोहर बलमा सुतेला सुख, लोकगीत काहे बतिया ई हमसे, काजर पराई गीत मांगे ननदिया कंगनवांकी प्रस्तुति हुई। छठ गीत पनवां से पातर, पचरा, बिरहा, दादरा और निर्गुण ने भी रंग बिखेरे।
मुख्य अतिथि परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, विशिष्ट अतिथि विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, पद्मश्री साहित्यकार विद्या विंदु सिंह और अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय मौजूद रहे। प्रतिभागियों व संगतकारों को प्रमाणपत्र और प्रतीक चिह्न से सम्मानित किया गया। आयोजक कमलेश कुमार पाठक और संयोजिका कविता पाठक समेत बढ़ी संख्या में श्रोता माैजूद रहे।
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20 प्रतिभागियों ने दी प्रस्तुति
कार्यशाला में अनुराधा यादव, शालिनी साहू, नीलिमा सिंह, डॉ. रश्मि उपाध्याय, आभा दीक्षित, भारती वर्मा, शांभवी मिश्रा, बीना त्रिपाठी, मनु रॉय, सोनी श्रीवास्तव, आरती शुक्ला, ऋतु करमचंदानी, सुनीता जायसवाल, अजय पासवान, अलका चतुर्वेदी, किरण सोनी, रजनी सिंह, सीमा अग्रवाल, श्रुति मालवीय और सुनीता चौरसिया ने भाग लिया। तबले पर पंडित अनिल महाराज, आर्गन पर पंडित चंद्रेश पांडेय, ऑक्टोपैड पर हर्षित मिश्रा और नगाड़े पर दीन मोहम्मद ने संगत की।
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उप्र. संस्कृति विभाग के सहयोग से कार्यशाला तीन अक्तूबर से वरिष्ठ भोजपुरी लोकगायक अवधेश कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में चल रही थी। समापन समारोह की शुरुआत देवी गीत अपने बचपन के... से हुई। फिर सोहर बलमा सुतेला सुख, लोकगीत काहे बतिया ई हमसे, काजर पराई गीत मांगे ननदिया कंगनवांकी प्रस्तुति हुई। छठ गीत पनवां से पातर, पचरा, बिरहा, दादरा और निर्गुण ने भी रंग बिखेरे।
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मुख्य अतिथि परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, विशिष्ट अतिथि विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, पद्मश्री साहित्यकार विद्या विंदु सिंह और अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय मौजूद रहे। प्रतिभागियों व संगतकारों को प्रमाणपत्र और प्रतीक चिह्न से सम्मानित किया गया। आयोजक कमलेश कुमार पाठक और संयोजिका कविता पाठक समेत बढ़ी संख्या में श्रोता माैजूद रहे।
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20 प्रतिभागियों ने दी प्रस्तुति
कार्यशाला में अनुराधा यादव, शालिनी साहू, नीलिमा सिंह, डॉ. रश्मि उपाध्याय, आभा दीक्षित, भारती वर्मा, शांभवी मिश्रा, बीना त्रिपाठी, मनु रॉय, सोनी श्रीवास्तव, आरती शुक्ला, ऋतु करमचंदानी, सुनीता जायसवाल, अजय पासवान, अलका चतुर्वेदी, किरण सोनी, रजनी सिंह, सीमा अग्रवाल, श्रुति मालवीय और सुनीता चौरसिया ने भाग लिया। तबले पर पंडित अनिल महाराज, आर्गन पर पंडित चंद्रेश पांडेय, ऑक्टोपैड पर हर्षित मिश्रा और नगाड़े पर दीन मोहम्मद ने संगत की।

लोकगायन कार्यशाला के समापन समारोह में प्रस्तुतिस देतीं महिलाएं।

लोकगायन कार्यशाला के समापन समारोह में प्रस्तुतिस देतीं महिलाएं।

लोकगायन कार्यशाला के समापन समारोह में प्रस्तुतिस देतीं महिलाएं।

लोकगायन कार्यशाला के समापन समारोह में प्रस्तुतिस देतीं महिलाएं।