{"_id":"6827a57f61c505c1cf0f5656","slug":"the-matter-of-burning-dengue-kits-without-testing-is-in-cold-storage-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1207426-2025-05-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: बिना जांच डेंगू किट जलाने का मामला ठंडे बस्ते में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: बिना जांच डेंगू किट जलाने का मामला ठंडे बस्ते में
विज्ञापन
बिना जांच डेंगू किट जलाने का मामला ठंडे बस्ते में
लखनऊ। रेडक्रॉस सीएचसी परिसर में सैकड़ों डेंगू किट जलाए जाने के मामले में अब तक न कोई जांच शुरू हुई है और न ही किसी तरह की कार्रवाई हुई है। यह किट अगले साल एक्सपायर होनी थीं, बावजूद इसके कर्मचारियों ने उन्हें आग के हवाले कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, डेंगू किट को सीएचसी, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और पीएचसी में जांच के लिए भेजा गया था, लेकिन जांच के दौरान उनमें गलत रिपोर्ट आ रही थी। इन शिकायतों के बाद भी किट निर्माता कंपनी को वापस करने के बजाय करीब 300 से अधिक किट जला दी गईं।
खास बात यह है कि इन किटों का निर्माण जुलाई 2024 में हुआ था और एक्सपायरी डेट मई 2026 थी। शुक्रवार को जले हुए किट का कचरा भी परिसर से हटाकर मामले को दबाने की कोशिश की गई।
विज्ञापन
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सीएचसी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही हैं। फिलहाल मामले में लापरवाही के साथ-साथ नियमों की अनदेखी और जवाबदेही तय न होने के कारण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार, डेंगू किट को सीएचसी, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और पीएचसी में जांच के लिए भेजा गया था, लेकिन जांच के दौरान उनमें गलत रिपोर्ट आ रही थी। इन शिकायतों के बाद भी किट निर्माता कंपनी को वापस करने के बजाय करीब 300 से अधिक किट जला दी गईं।
विज्ञापन
खास बात यह है कि इन किटों का निर्माण जुलाई 2024 में हुआ था और एक्सपायरी डेट मई 2026 थी। शुक्रवार को जले हुए किट का कचरा भी परिसर से हटाकर मामले को दबाने की कोशिश की गई।
विज्ञापन
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और सीएचसी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही हैं। फिलहाल मामले में लापरवाही के साथ-साथ नियमों की अनदेखी और जवाबदेही तय न होने के कारण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।