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Lucknow News: आज भी प्रासंगिक है प्रेमचंद, मैथिलीशरण और जगदीश गुप्त का साहित्य

Thu, 06 Aug 2026 02:32 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 02:32 AM IST
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The literature of Premchand, Maithilisharan, and Jagdish Gupta remains relevant even today.
लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में बुधवार को प्रेमचंद, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त और कवि-चित्रकार जगदीश गुप्त की स्मृति में संगोष्ठी आयोजित की गई। हिंदी भवन के प्रेमचंद सभागार में आयोजित कार्यक्रम में तीनों साहित्यकारों के साहित्य, विचार और भारतीय समाज में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन संस्थान की प्रधान संपादक डॉ. अमिता दुबे ने किया। कार्यक्रम में डॉ. राकेश कुमार शुक्ल, ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य यथार्थ, सामाजिक परिवर्तन और मानवीय मूल्यों का सशक्त दस्तावेज है। डॉ. पवन अग्रवाल ने मैथिलीशरण गुप्त को भारतीय संस्कृति और नवजागरण का संवाहक बताया। डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी ने कहा कि ब्रज भाषा, चित्रकला और साहित्य में जगदीश गुप्त का योगदान उल्लेखनीय है। इस मौके पर प्रेमचंद की कजाकी, परीक्षा और आत्माराम का वाचन किया गया। वहीं, मैथिलीशरण गुप्त की प्रकृति और जगदीश गुप्त की वर्षा और भाषा व सांझ का भी पाठ हुआ।
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