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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   The land of the mosque to be built in Ayodhya is not against Sharia, Waqf Board has paid stamp duty of Rs 9 lakhs.

अयोध्या में बनने वाली मस्जिद की जमीन शरियत के खिलाफ नहीं, वक्फ बोर्ड ने 9 लाख रुपये अदा की है स्टाम्प ड्यूटी

Thu, 24 Dec 2020 06:46 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 24 Dec 2020 06:46 PM IST
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The land of the mosque to be built in Ayodhya is not against Sharia, Waqf Board has paid stamp duty of Rs 9 lakhs.
धन्नीपुर में बनने वाली मस्जिद का डिजाइन। - फोटो : amar ujala
सुन्नी वक्फ बोर्ड के चैयरमैन  एवं इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष जुफर फारूकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बोर्ड को अयोध्या के धन्नीपुर गांव में मिली पांच एकड़ जमीन शरीयत और वक्फ एक्ट के खिलाफ नहीं है। कोर्ट ने ये जमीन बाबरी मस्जिद के विकल्प के तौर पर नहीं बल्कि संपति के रूप में दिया है। वक्फ बोर्ड ने इस जमीन की 9,29400 रुपये स्टाम्प ड्यूटी जमा की है।
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दरअसल आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव एवं बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जीलानी सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में मिली 5 एकड़ जमीन को शरीयत और वक्फ एक्ट के बताते आ रहे हैं। जुफर फारूकी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति शरिया और मुसलमानों का एक मात्र प्रतिनिधि होने का दावा नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनके बयान लोगों मे भ्रम पैदा करने वाले है। फारूकी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के किसी भी आदेश में यह उल्लेख नहीं किया गया कि धन्नीपुर गांव में पांच एकड़ जमीन बाबरी मस्जिद के विकल्प के रूप में दी गई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस जमीन को संपति के रूप में दिया है। यह भूमि वक्फ भी नहीं है। यह नई भूमि है। इस भूमि का स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क 9,29,400 रुपये सोहावल तहसील में इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के नाम से भुगतान किया गया है।  
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उन्होंने कहा कि 9 नवंबर, 2019 को उच्चतम न्यायालय के 1,048-पृष्ठ के आदेश में कहीं भी विकल्प या वक्फ का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने बाबरी मस्जिद के वक्फ होने के तर्क को स्वीकार नही किया था। जो कोर्ट के निर्णय के पैर 743 में दर्ज है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को केवल जमीन देने का आदेश दिया है। यह भूमि अब सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की मिलकियत है। जिसको सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट को सुप्रुद कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह एक निर्णय है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संपति के रूप में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया है।
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अब सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को इस जमीन पर मस्जिद, अस्पताल, म्यूजियम और पुस्तकालय बनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि धन्नीपुर गांव की भूमि विकल्प या वक्फ नहीं है। ट्रस्ट के सचिव व प्रवक्ता अतहर हुसैन ने कहा कि यह सिर्फ एक निर्णय है। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने संपति के रूप में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया है। ये जमीन बाबरी विकल्प नही है तो शरियत के खिलाफ कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि जीलानी साहब वरिस्ठ वकील है, उन्हें कोर्ट के आदेश की पूरी जानकारी है। अगर उन्हें कोई ऐतराज है तो वो इसके खिलाफ कोर्ट जा सकते हैं।
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