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Lucknow News: हाईकोर्ट ने छह सप्ताह में मांगी प्रगति रिपोर्ट

Mon, 23 Mar 2026 02:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 02:18 AM IST
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The High Court has sought a progress report within six weeks.
हाईकोर्ट।
लखनऊ। हाईकोर्ट ने केजीएमयू में कथित रूप से जहर की शिकार महिला को भर्ती न किए जाने के बाद हुई मृत्यु के मामले में संबंधित अधिकारी से छह सप्ताह के भीतर निजी हलफनामे के साथ प्रगति रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 11 मई तय करते हुए चेतावनी भी दी है कि यदि हलफनामा दाखिल नहीं हुआ तो अधिकारी को रिकॉर्ड सहित व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
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न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबिता रानी की खंडपीठ ने यह आदेश उर्मिला की याचिका पर दिया। याचिका में आरोप है कि जहर की शिकार महिला को अस्पताल में भर्ती करने से इन्कार कर दिया गया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई।
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इससे पहले 11 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ तब स्तब्ध रह गई थी, जब यह जानकारी सामने आई कि केजीएमयू ने बेड उपलब्ध न होने का हवाला देकर महिला की हालत गंभीर होने पर भी भर्ती करने से इन्कार कर दिया था। इलाज न मिलने के कारण अगले दिन उसकी मृत्यु हो गई थी। कोर्ट ने तब टिप्पणी की थी कि राज्य की राजधानी का प्रमुख चिकित्सा संस्थान यदि इस तरह मरीज को लौटा रहा है, तो यह चिकित्सा व्यवस्था की दयनीय स्थिति को दर्शाता है।
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कोर्ट ने मुख्य सचिव को मामले की जांच कर अगली सुनवाई तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था, साथ ही प्रमुख सचिव (गृह) को निजी हलफनामा दाखिल करने को कहा था। 19 मार्च को अपर मुख्य सचिव (गृह) ने हलफनामा दाखिल कर प्रगति रिपोर्ट के लिए छह सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।


यह है मामला

यह याचिका बहराइच के खेरीघाट थाने में दर्ज कथित दहेज हत्या के एक मामले से जुड़ी है। रिकॉर्ड के अनुसार, 29 अगस्त 2025 की रात करीब 2:33 बजे पीड़िता को गंभीर हालत में केजीएमयू लाया गया था। प्रारंभिक रिपोर्ट में महिला को चूहे मारने की दवा देने की आशंका जताई गई। बहराइच से रेफर होकर महिला केजीएमयू लाई गई थी, मगर यहां भी उसे बेड उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए भर्ती करने से इन्कार कर दिया और मरीज को बलरामपुर या आरएमएल अस्पताल ले जाने को कहा गया। बाद में इलाज में देरी से उसकी मृत्यु हो गई थी।
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