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Lucknow News: शारंगदेव महोत्सव में जीवंत हुई शास्त्रीय कलाओं की धरोहर
Mon, 02 Feb 2026 01:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:39 AM IST
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शारंगदेव महोत्सव में जीवंत हुई शास्त्रीय कलाओं की धरोहर
लखनऊ। अमीनाबाद स्थित कालका बिंदादीन की ड्योढ़ी कथक संग्रहालय में तीन दिवसीय 19वें शारंगदेव महोत्सव का रविवार को भव्य और आध्यात्मिक समापन हुआ। यह महोत्सव भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय एवं महागामी गुरुकुल छत्रपति संभाजीनगर के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शास्त्रीय कलाओं और साधना का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां भक्ति और लय का अद्भुत समन्वय सराबोर रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की निदेशक पार्वती दत्ता के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के ध्यान अभ्यास से हुआ, जिससे कला को मानसिक शांति और एकाग्रता से जोड़ने का संदेश दिया गया। कथक कार्यशाला में बंशीधर पिनाक धर ने ध्रुपद गायन पर कथक नृत्य की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान हारमोनियम पर आरिफ मोहम्मद और पखावज पर राजीव रंजन की संगत ने प्रस्तुति को और जीवंत बना दिया।
इसके बाद पंडित मोहन राव कल्याणपुरकर के निर्देशन में सांस्कृतिक गायन प्रस्तुति हुई। कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, पद्मश्री नृत्यांगना दर्शना झावेरी और पूर्व कुलपति प्रो. पूर्णिमा पांडेय ने शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने कथक के तकनीकी और सौंदर्यात्मक पक्षों पर प्रस्तुतियां देकर पुष्पांजलि अर्पित की।
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पूरे वर्ष चलेंगी कार्यशालाएं
कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने घोषणा की कि पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज की स्मृति में स्थापित ''चेयर'' के माध्यम से पूरे वर्ष कार्यशालाएं और अनुसंधान कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक योगदान से परिचित कराना है।
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कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की निदेशक पार्वती दत्ता के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के ध्यान अभ्यास से हुआ, जिससे कला को मानसिक शांति और एकाग्रता से जोड़ने का संदेश दिया गया। कथक कार्यशाला में बंशीधर पिनाक धर ने ध्रुपद गायन पर कथक नृत्य की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान हारमोनियम पर आरिफ मोहम्मद और पखावज पर राजीव रंजन की संगत ने प्रस्तुति को और जीवंत बना दिया।
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इसके बाद पंडित मोहन राव कल्याणपुरकर के निर्देशन में सांस्कृतिक गायन प्रस्तुति हुई। कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, पद्मश्री नृत्यांगना दर्शना झावेरी और पूर्व कुलपति प्रो. पूर्णिमा पांडेय ने शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने कथक के तकनीकी और सौंदर्यात्मक पक्षों पर प्रस्तुतियां देकर पुष्पांजलि अर्पित की।
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पूरे वर्ष चलेंगी कार्यशालाएं
कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने घोषणा की कि पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज की स्मृति में स्थापित ''चेयर'' के माध्यम से पूरे वर्ष कार्यशालाएं और अनुसंधान कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक योगदान से परिचित कराना है।

शारंगदेव महोत्सव में जीवंत हुई शास्त्रीय कलाओं की धरोहर

शारंगदेव महोत्सव में जीवंत हुई शास्त्रीय कलाओं की धरोहर

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शारंगदेव महोत्सव में जीवंत हुई शास्त्रीय कलाओं की धरोहर