फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   The farmer kept getting crushed between the movement and the politics: Bearing the brunt of the 10-month agitation

आंदोलन और सियासत के बीच पिसता रहा किसान : 10 महीने के आंदोलन का भुगता खामियाजा

Tue, 05 Oct 2021 02:25 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ/महेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ/महेंद्र तिवारी Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 05 Oct 2021 02:25 AM IST
सार

किसानों से संबंधित तीन कानूनों की वापसी की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन चुनावी नफा-नुकसान की तुला पर अटक गया है। लिहाजा, इसका अब तक कोई सार्थक नतीजा सामने नहीं आ पाया है।

विज्ञापन
The farmer kept getting crushed between the movement and the politics: Bearing the brunt of the 10-month agitation
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लखीमपुर खीरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने किसानों के नाम पर सियासत और गरमा दी है। पिछले 10 महीने से किसान आंदोलन के बहाने सत्तापक्ष और विपक्ष की सियासत जारी है। किसानों से संबंधित तीन कानूनों की वापसी की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन चुनावी नफा-नुकसान की तुला पर अटक गया है। लिहाजा, इसका अब तक कोई सार्थक नतीजा सामने नहीं आ पाया है।

विज्ञापन


जानकार बताते हैं कि इस वर्ष 26 जनवरी को लाल किला की घटना के बाद रविवार को खीरी की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना किसी भी वजह से और किसी की भी वजह से हुई लेकिन, खामियाजा किसान को ही भुगतना पड़ा। बेटा, पति व भाई किसान परिवार को ही खोना पड़ा है। हालात ये हैं कि सत्ता पक्ष व विपक्ष की नाक की लड़ाई में किसानों के मुद्दे गौण हो गए हैं। सियासी लाभ की चाहत में दोनों ही पक्ष अड़ियल रुख अपनाए हुए हैं। किसानों की समस्या जस की तस बनी हुई है। वह दिल्ली से खीरी तक खोने के सिवा कुछ नहीं पा सका है। विश्लेषकों का कहना है कि  दोनों ही पक्षों को बीच का रास्ता तलाशना चाहिए। 
विज्ञापन


कानून की खामियों पर चर्चा के लिए संवाद करें : त्यागी
जैविक खेती के जरिए अलग पहचान बनाने वाले प्रतिष्ठित किसान पद्मश्री भारत भूषण त्यागी खीरी की घटना से बहुत व्यथित हैं। वह कहते हैं कि आंदोलन का मतलब समस्या का रास्ता निकालने से है। यह आंदोलन जिस रास्ते पर है, वह बहुत दुखद है। इसमें अब तक किसानों ने ही सब खोया है। देश का नुकसान हुआ है। इस आंदोलन के पीछे विपक्ष की जगह विरोध की मानसिकता काम कर रही है। कानून की खामियों को दूर करने के लिए संवाद होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


कानून में संशोधन से टूट सकता है गतिरोध : वीएम सिंह
किसान नेता वीएम सिंह पिछले 25 वर्षों से गन्ना किसानों की लड़ाई लड़ते रहे हैं। उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि किसान इतने दिनों से आंदोलन पर हैं, लेकिन गतिरोध दूर नहीं हो रहा है। चार अगस्त को उनकी एक बैठक हुई थी, जिसमें उन्होंने कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध तोड़ने का रास्ता सुझाया था। सरकार चाहे तो गतिरोध तत्काल टूट सकता है। बात तब बिगड़ती है जब अजय मिश्र जैसे लोग किसानों को भड़काने का काम करते हैं। 


सियासत छोड़, समाधान के रास्ते पर बढ़ें : राहुल
रघुवंश एग्रोटेक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (कानपुर देहात) के निदेशक राहुल सचान 1000 से अधिक किसानों के समूह की अगुवाई करते हैं। राहुल कहते हैं कि बड़े से बड़े युद्ध हो गए, लाखों लोगों की जान चली गई लेकिन समस्या का समाधान ‘टेबिल-टॉक’ से ही हुआ है। ऐसे में किसानों की आड़ में की जाने वाली सियासत छोड़कर समस्या के समाधान के प्रमुख रास्ते पर बढ़ना चाहिए। सरकार व आंदोलनकारी फिर से आमने-सामने बैठें और हल निकालें। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed