{"_id":"6aac54ad840c6281f2068f1e","slug":"the-doctor-refused-to-send-the-patient-to-a-private-hospital-lucknow-news-c-13-lko1096-1925083-2026-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: डॉक्टर ने मरीज को निजी अस्पताल भेजने से किया इन्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: डॉक्टर ने मरीज को निजी अस्पताल भेजने से किया इन्कार
विज्ञापन
केजीएमयू।
लखनऊ। केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी से मरीज को निजी अस्पताल भेजने के मामले में आरोपी डॉक्टर ने बयान दर्ज करा दिया है। बयान में उसने आरोपों से इन्कार किया है। विभागाध्यक्ष ने मामले की रिपोर्ट कुलपति को सौंपी है।
बस्ती के कुदरहा ब्लॉक निवासी पुष्पा (54) किडनी रोग से पीड़ित थीं। परिजन उन्हें केजीएमयू नेफ्रोलॉजी विभाग ले गए थे। आरोप है कि बॉन्ड के तहत तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर ने फेफड़े में संक्रमण बताया और केजीएमयू में प्रक्रिया में देरी का हवाला देते हुए मरीज को दुबग्गा स्थित फाह हॉस्पिटल भेजा दिया। वहां आयुष्मान योजना से मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद भी परिजनों से करीब एक लाख रुपये वसूले गए। बाद में मरीज की मौत हो गई।
पुष्पा के बेटे विजय कुमार चौधरी ने डॉक्टर पर इलाज के नाम पर वसूली का आरोप लगाया था। नेफ्रोलॉजी के विभागाध्यक्ष को मामले की जांच सौंपी गई थी। आरोपी डॉक्टर लगातार निजी अस्पताल में मरीज का इलाज न करने का दावा करता रहा। लीक हुई ऑडियो में विभागाध्यक्ष का नाम लेने पर डॉक्टर ने लिखित माफी मांगी है। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, परिजनों का बयान व शिकायती पत्र अभी नहीं मिला है। वायरल रिकॉर्डिंग के साथ अन्य साक्ष्य जांच में शामिल किए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बस्ती के कुदरहा ब्लॉक निवासी पुष्पा (54) किडनी रोग से पीड़ित थीं। परिजन उन्हें केजीएमयू नेफ्रोलॉजी विभाग ले गए थे। आरोप है कि बॉन्ड के तहत तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर ने फेफड़े में संक्रमण बताया और केजीएमयू में प्रक्रिया में देरी का हवाला देते हुए मरीज को दुबग्गा स्थित फाह हॉस्पिटल भेजा दिया। वहां आयुष्मान योजना से मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद भी परिजनों से करीब एक लाख रुपये वसूले गए। बाद में मरीज की मौत हो गई।
विज्ञापन
पुष्पा के बेटे विजय कुमार चौधरी ने डॉक्टर पर इलाज के नाम पर वसूली का आरोप लगाया था। नेफ्रोलॉजी के विभागाध्यक्ष को मामले की जांच सौंपी गई थी। आरोपी डॉक्टर लगातार निजी अस्पताल में मरीज का इलाज न करने का दावा करता रहा। लीक हुई ऑडियो में विभागाध्यक्ष का नाम लेने पर डॉक्टर ने लिखित माफी मांगी है। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, परिजनों का बयान व शिकायती पत्र अभी नहीं मिला है। वायरल रिकॉर्डिंग के साथ अन्य साक्ष्य जांच में शामिल किए गए हैं।
विज्ञापन