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Lucknow News: हाईवे से सटी सीएचसी अपडेट होकर बनेंगी ट्रॉमा सेंटर, 24 घंटे मिलेगा इलाज

Sat, 21 Feb 2026 02:22 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 02:22 AM IST
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The CHC adjacent to the highway will be upgraded and converted into a trauma center, providing treatment 24 hours a day.
प्रतीकात्मक।
लखनऊ। राजधानी में हाईवे से सटी सीएचसी को अपडेट कर उन्हें ट्रॉमा सेंटर में तब्दील किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग इसकी कार्ययोजना बना रहा है। इसे लेकर संसाधन समेत विशेषज्ञ जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यहां सड़क हादसे में जख्मी मरीजों को 24 घंटे इलाज मिलेगा। अभी सीएचसी में हादसे के पीड़ित मरीजों को जिला अस्पताल या हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
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जिले में 20 सीएचसी हैं। इसमें हाईवे से सटी पांच सीएचसी मोहनलालगंज, सरोजनीनगर, गोसाईंगंज, काकोरी, चिनहट को सड़क सुरक्षा के तहत ट्रॉमा सेंटर में बदला जाएगा। अभी यहां हादसे में जख्मी मरीजों के इलाज के पुख्ता इंतजाम नहीं है। ऐसे में डॉक्टर प्राथमिक उपचार देकर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर देते हैं।
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ट्रॉमा सेंटर में अपडेट होने के बाद इन पांचों सीएचसी में पांच बेड की आईसीयू व कुशल विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे। जांच के पुख्ता इंतजाम भी किए जाएंगे। अभी तक शाम ढलते ही सीएचसी में जांच बंद हो जाती है। एक्सरे तक आसानी से रात में नहीं होती। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि पांचों सीएचसी को ट्रॉमा के तौर पर बदला जाएगा। यहां 24 घंटे इलाज के इंतजाम होंगे। इसके लिए संसाधन व बजट की मांग हुई है। उम्मीद है कि बजट मिलने पर आगामी डेढ़ से दो माह में इन सीएचसी को ट्रॉमा में बदल दिया जाएगा।
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निजी अस्पतालों से भी किया जा रहा अनुबंध
सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित एवं मुफ्त उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कैशलैस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स स्कीम-2025 लागू की गई है। इसके तहत सरकारी के साथ ही निजी अस्पताल भी घायलों को तत्काल इलाज मुहैया कराएंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के करीब 82 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि अब दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज सरकारी ही नहीं, सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी निशुल्क किया जाएगा। कानपुर रोड, अयोध्या, सीतापुर रोड, हरदाेई समेत दूसरे हाईवे से सटे बड़े अस्पतालों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। इसमें उन अस्पतालों को शामिल किया जा रहा है, जहां आर्थोपैडिक, सर्जन, फिजिशियन व न्यूरो सर्जन तैनात हैं। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के उपचार पर आने वाला अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च जिला सड़क सुरक्षा समिति उठाएगी।
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