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Lucknow News: रश्मिरथी के माध्यम से मंच पर उतरा महापराक्रमी कर्ण का चरित्र

Tue, 18 Mar 2025 02:04 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 18 Mar 2025 02:04 AM IST
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The character of the mighty Karna came on stage through Rashmirathi
नाटक मंचन करते कलाकार।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में सोमवार शाम तीन दिवसीय प्रादेशिक नाट्य समारोह का उद्घाटन किया गया। पहले दिन देवरिया के सलेमपुर की नाट्य संस्था सांस्कृतिक संगम की ओर से रश्मिरथी की नाट्य प्रस्तुति हुई। नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि मनुष्य का मूल्यांकन उसके वंश से नहीं, बल्कि आचरण और कर्म से किया जाना चाहिए।
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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी रचना रश्मिरथी में महाभारत के अहम किरदार महापराक्रमी कर्ण के चरित्र को संग गाडगे प्रेक्षागृह के मंच पर मानवेंद्र कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में उतारा गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी ललित सिंह पोखरिया के अलावा अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह, निदेशक डॉ. शोभित नाहर ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस दौरान वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी भी मौजूद रहे।
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नाटक की कथावस्तु कर्ण के जन्म से प्रारंभ होती है। वह सूर्यपुत्र होने के बावजूद मां कुंती जन्म के तुरंत बाद उन्हें नदी में बहा देती हैं। अधिरथ और राधा नामक सारथी दंपती उन्हें पालते हैं। कर्ण क्षत्रिय योद्धा बनने की इच्छा रखते हुए गुरु द्रोणाचार्य के पास जाते हैं। राजपुत्र न होने के कारण उन्हें शिक्षा नहीं मिलती है। तब वह परशुराम का शिष्य बनकर अस्त्र-शस्त्र की विद्या सीखते हैं। द्रौपदी के स्वयंवर में भी कर्ण को राजपुत्र न होने के कारण भाग लेने से रोका जाता है। इस अपमान से दुखी होकर वह क्रोध से भर जाते हैं। कुरुक्षेत्र के युद्ध में कर्ण और अर्जुन के बीच भयंकर युद्ध होता है। युद्ध के दौरान कर्ण का रथ धरती में धंस जाता है। श्रीकृष्ण के आदेश पर अर्जुन, कर्ण को मार देते हैं।
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मंच पर कर्ण की भूमिका मानवेंद्र त्रिपाठी ने निभाई। वहीं, कृष्ण की भूमिका में राज मौर्य, परशुराम की भूमिका में रवींद्र रंगधर और अर्जुन की भूमिका आलोक सिंह ने निभाई। इसके अलावा अन्य पात्रों की भूमिका आकांक्षा विक्ट्री, प्रमोद सिंह, नवनीत जायसवाल, मनीष श्रीवास्तव, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, अजय ठाकुर, उपहार मिश्रा, सागर चौधरी, हरीश शर्मा, विजय सिंह ने निभाईं।

अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर ने बताया कि प्रादेशिक नाट्य समारोह के तहत 18 मार्च को दर्पण लखनऊ की प्रस्तुति आखिरी वसंत का मंचन शुभदीप राहा के लेखन और निर्देशन में किया जाएगा। 19 मार्च को शाहजहांपुर की नाट्य संस्था गगनिका द्वारा नाटक भुवनेश्वर-दर-भुवनेश्वर का मंचन कप्तान सिंह कर्णधार के निर्देशन में किया जाएगा। इसका लेखन मीराकांत ने किया है।
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