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Lucknow News: बच्चों की बहादुरी ने खोली मलिन बस्ती में विकास की राह, टीम ने किया सर्वे
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लखनऊ। न तो बस्ती तक जाने का रास्ता, बारिश होते ही कीचड़ और पीने के लिए गंदे पानी पर निर्भरता। यह नजारा कुड़ियाघाट के पास बनी उस बस्ती का है जहां के चार बहादुर बच्चों मो. हसीब, गुफरान, तौसीफ और दिशान ने गोमती में फेंके गए नवजात को निकालने के लिए खुद की जिंदगी दांव पर लगाई।
बच्चों की बहादुरी और राज्यपाल से उनकी मुलाकात के बाद अब मलिन बस्ती में महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे शुरू कराए हैं। इसमें बुनियादी सुविधाओं की हकीकत को परखा जा रहा है।
शनिवार को दोपहर में अलग-अलग टीमें यहां सर्वे करने पहुंचीं। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में 62 परिवार यहां रहते हुए मिले। सर्वे टीमों ने सरकारी योजनाओं के लाभ जैसे राशन, बैंक में खाता, रोजगार, बच्चों को शिक्षा और उनकी संख्या आदि के बारे में जानकारी ली।
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शिक्षा विभाग की तरफ से नैपियर रोड प्राथमिक विद्यालय से आईं सहायक अध्यापिका तहजीब फातिमा और शिक्षामित्र रेखा शुक्ला के अनुसार, डाटा जुटाया जा रहा है कि किस बच्चे ने स्कूल में दाखिला ही नहीं लिया और किसने बीच में पढ़ाई छोड़ दी।
इसी तरह महिला एवं बाल विकास विभाग से आईं नीलिमा शुक्ला ने बताया कि देख रहे हैं कि आखिर किस तरह से इन परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सकता है।
जिला परियोजना अधिकारी विकास सिंह ने बताया कि शुरुआती सर्वे में बस्ती में 62 परिवार रहते हुए मिले। इनमें आठ सीतापुर, एक बहराइच, एक पूर्वी चंपारण बिहार और 52 असम राज्य के अलग-अलग जिलों के हैं। असम के लोग कूड़ा बीनने का काम करते हैं। बाकी लोग अस्पतालों के अलावा अन्य अस्थाई कामों से जुड़े हैं। बच्चे भी माता-पिता के साथ ही काम में मदद करते हैं। इन सभी को पहले शिक्षा और आंगनबाड़ी से जोड़ा जाएगा। लखनऊ से इन लोगों के राशनकार्ड नहीं बने हैं, लेकिन सभी के पास अपने मूल जगह के राशन कार्ड हैं। इससे सभी को राशन अभी मिल जाता है।
148 बच्चे बस्ती में रह रहे
शुरुआती सर्वे में 148 बच्चे बस्ती में रहते हुए मिले हैं। इनमें से तीन साल से कम उम्र के 29 बच्चे और तीन से 14 साल के बीच के 119 बच्चे हैं। सीडीओ रिया केजरीवाल ने इन बच्चों को पहले आंगनबाड़ी और स्कूल से जोड़ने के लिए कहा है। सभी बच्चों के टीकाकरण की भी जांच की जा रही है। परिवार के लोगों ने बताया कि टीकाकरण के लिए पहले कैंप लगाए गए थे। इसका सत्यापन कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को कहा गया है। इसके बाद परिजनों को कामकाज से जोड़ने के अलावा प्रत्येक माह आर्थिक मदद भी दिलाने का काम होगा।
बच्चे बोले- हमारा भी मन करता है कि पढ़ने जाएं
बहादुर बच्चों में शामिल नौ साल के मो. हसीब का कहना है कि हमारा भी मन करता है कि पढ़ने जाएं। लेकिन, सात भाई-बहन हैं। अब्बा माली का काम करते हैं। उनकी कमाई से खर्च नहीं चलता। ऐसे में सभी को छोटा-मोटा काम करना पड़ता है। इसी तरह गुफरान, तौसीफ, दिशान ने भी अपनी पढ़ने की इच्छा जताई।
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बच्चों की बहादुरी और राज्यपाल से उनकी मुलाकात के बाद अब मलिन बस्ती में महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे शुरू कराए हैं। इसमें बुनियादी सुविधाओं की हकीकत को परखा जा रहा है।
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शनिवार को दोपहर में अलग-अलग टीमें यहां सर्वे करने पहुंचीं। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में 62 परिवार यहां रहते हुए मिले। सर्वे टीमों ने सरकारी योजनाओं के लाभ जैसे राशन, बैंक में खाता, रोजगार, बच्चों को शिक्षा और उनकी संख्या आदि के बारे में जानकारी ली।
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शिक्षा विभाग की तरफ से नैपियर रोड प्राथमिक विद्यालय से आईं सहायक अध्यापिका तहजीब फातिमा और शिक्षामित्र रेखा शुक्ला के अनुसार, डाटा जुटाया जा रहा है कि किस बच्चे ने स्कूल में दाखिला ही नहीं लिया और किसने बीच में पढ़ाई छोड़ दी।
इसी तरह महिला एवं बाल विकास विभाग से आईं नीलिमा शुक्ला ने बताया कि देख रहे हैं कि आखिर किस तरह से इन परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सकता है।
जिला परियोजना अधिकारी विकास सिंह ने बताया कि शुरुआती सर्वे में बस्ती में 62 परिवार रहते हुए मिले। इनमें आठ सीतापुर, एक बहराइच, एक पूर्वी चंपारण बिहार और 52 असम राज्य के अलग-अलग जिलों के हैं। असम के लोग कूड़ा बीनने का काम करते हैं। बाकी लोग अस्पतालों के अलावा अन्य अस्थाई कामों से जुड़े हैं। बच्चे भी माता-पिता के साथ ही काम में मदद करते हैं। इन सभी को पहले शिक्षा और आंगनबाड़ी से जोड़ा जाएगा। लखनऊ से इन लोगों के राशनकार्ड नहीं बने हैं, लेकिन सभी के पास अपने मूल जगह के राशन कार्ड हैं। इससे सभी को राशन अभी मिल जाता है।
148 बच्चे बस्ती में रह रहे
शुरुआती सर्वे में 148 बच्चे बस्ती में रहते हुए मिले हैं। इनमें से तीन साल से कम उम्र के 29 बच्चे और तीन से 14 साल के बीच के 119 बच्चे हैं। सीडीओ रिया केजरीवाल ने इन बच्चों को पहले आंगनबाड़ी और स्कूल से जोड़ने के लिए कहा है। सभी बच्चों के टीकाकरण की भी जांच की जा रही है। परिवार के लोगों ने बताया कि टीकाकरण के लिए पहले कैंप लगाए गए थे। इसका सत्यापन कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग को कहा गया है। इसके बाद परिजनों को कामकाज से जोड़ने के अलावा प्रत्येक माह आर्थिक मदद भी दिलाने का काम होगा।
बच्चे बोले- हमारा भी मन करता है कि पढ़ने जाएं
बहादुर बच्चों में शामिल नौ साल के मो. हसीब का कहना है कि हमारा भी मन करता है कि पढ़ने जाएं। लेकिन, सात भाई-बहन हैं। अब्बा माली का काम करते हैं। उनकी कमाई से खर्च नहीं चलता। ऐसे में सभी को छोटा-मोटा काम करना पड़ता है। इसी तरह गुफरान, तौसीफ, दिशान ने भी अपनी पढ़ने की इच्छा जताई।