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Lucknow News: लावारिस मरीज को मिले अपने
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डॉक्टरों के साथ सोरेन।
लखनऊ। केजीएमयू के डॉक्टरों ने लावारिस हालत में भर्ती मरीज का न सिर्फ इलाज किया, बल्कि उसके घरवालों से भी मिलाया। झारखंड निवासी हाम्बाई सोरेन को 22 दिसंबर को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया था।
न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. बीके ओझा ने बताया कि हाम्बाई सोरेन बाराबंकी में बेहोशी की हालत में रेलवे ट्रैक के पास पड़ा मिला था। गंभीर हालत में उसे ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। यहां सीटी स्कैन समेत दूसरी जांच होने पर मस्तिष्क में रक्तस्राव की पुष्टि हुई। इस पर आईसीयू में भर्ती कर उसका ऑपरेशन किया गया। इसके बाद होश में आने पर उसने अपनी पहचान बताई। परिवार के कुछ सदस्यों डिजिल सोरेन, दखिन सोरेन, कनई सोरेन के नाम भी बताए। उसने बताया कि वह झारखंड के चिकुलिया थानाक्षेत्र के बर्डी कानपुर गांव का रहने वाला है। पुलिस के माध्यम से उससे संपर्क किया गया।
आठ साल पहले हुआ था गुम
युवक के घरवालों ने बताया कि हाम्बाई सोरेन करीब आठ साल पहले गांव से लापता हो गया था। उस समय वह 12 वर्ष का था। उस समय वह मानसिक मंदित था। काफी तलाश करने पर जब वह नहीं मिला तो घरवालों ने हिम्मत छोड़ दी थी। अब अचानक केजीएमयू की वजह से हाम्बाई अपने घरवालों से मिल सका।
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न्यूरो सर्जरी विभाग ने 200 लावारिसों का किया है इलाज
न्यूरो सर्जरी विभाग के अतुल उपाध्याय ने बताया कि अब तक केजीएमयू प्रशासन ने करीब 200 लावारिस मरीजों का इलाज कर उन्हें उनके घरवालों से मिलवाया है। मरीज की सेवा में ट्रॉमा सेंटर में न्यूरो सर्जरी विभाग की सिस्टर इंचार्ज रजनी सिंह और उनकी टीम ने मेहनत की।
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न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. बीके ओझा ने बताया कि हाम्बाई सोरेन बाराबंकी में बेहोशी की हालत में रेलवे ट्रैक के पास पड़ा मिला था। गंभीर हालत में उसे ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। यहां सीटी स्कैन समेत दूसरी जांच होने पर मस्तिष्क में रक्तस्राव की पुष्टि हुई। इस पर आईसीयू में भर्ती कर उसका ऑपरेशन किया गया। इसके बाद होश में आने पर उसने अपनी पहचान बताई। परिवार के कुछ सदस्यों डिजिल सोरेन, दखिन सोरेन, कनई सोरेन के नाम भी बताए। उसने बताया कि वह झारखंड के चिकुलिया थानाक्षेत्र के बर्डी कानपुर गांव का रहने वाला है। पुलिस के माध्यम से उससे संपर्क किया गया।
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आठ साल पहले हुआ था गुम
युवक के घरवालों ने बताया कि हाम्बाई सोरेन करीब आठ साल पहले गांव से लापता हो गया था। उस समय वह 12 वर्ष का था। उस समय वह मानसिक मंदित था। काफी तलाश करने पर जब वह नहीं मिला तो घरवालों ने हिम्मत छोड़ दी थी। अब अचानक केजीएमयू की वजह से हाम्बाई अपने घरवालों से मिल सका।
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न्यूरो सर्जरी विभाग ने 200 लावारिसों का किया है इलाज
न्यूरो सर्जरी विभाग के अतुल उपाध्याय ने बताया कि अब तक केजीएमयू प्रशासन ने करीब 200 लावारिस मरीजों का इलाज कर उन्हें उनके घरवालों से मिलवाया है। मरीज की सेवा में ट्रॉमा सेंटर में न्यूरो सर्जरी विभाग की सिस्टर इंचार्ज रजनी सिंह और उनकी टीम ने मेहनत की।