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Lucknow News: कील से हुआ टिटनेस, डॉक्टरों ने बचाई जान
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लखनऊ। सीतापुर निवासी राजेश कुमार के पैर में 20 दिन पहले खेत में काम करते वक्त कील घुस गई। उसने टिटनेस से बचाव के लिए इंजेक्शन नहीं लगवाया। ऐसे में चार दिन बाद उसका मुंह खुलना बंद हो गया और मांसपेशियां अकड़ गईं। परिजनों ने गंभीर हालत में उसे एरा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। यहां क्रिटिकल केयर की यूनिट में उसकी जान बचाई गई।
क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुस्तहसिन मलिक ने बताया कि राजेश की हालत खराब होने पर परिजन उसे सीतापुर के जिला अस्पताल ले गए। दो दिन बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। उसे 16 जून को एरा मेडिकल कॉलेज की आईसीयू में शिफ्ट कर इलाज शुरू किया गया। तीन सप्ताह बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
ऐसे होता है टिटनेस
डॉ. मुस्तहसिन मलिक ने बताया कि आम तौर पर टिटनेस मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से पैदा होने वाले विष के कारण होता है। यह गहरे घावों में प्रवेश कर जाता है। इसका तुरंत इलाज जरूरी होता है। टिटनेस के लक्षण चार से 21 दिन में दिख सकते हैं। उन लोगों को अधिक खतरा रहता है, जिन्होंने टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लगाया हो। टिटनेस के बचने के लिए सभी को हर 10 वर्ष में बूस्टर लगवाना चाहिए। बताया कि टिटनेस के गंभीर मरीजों में से 40 प्रतिशत ही बच पाते हैं।
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क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुस्तहसिन मलिक ने बताया कि राजेश की हालत खराब होने पर परिजन उसे सीतापुर के जिला अस्पताल ले गए। दो दिन बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। उसे 16 जून को एरा मेडिकल कॉलेज की आईसीयू में शिफ्ट कर इलाज शुरू किया गया। तीन सप्ताह बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।
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ऐसे होता है टिटनेस
डॉ. मुस्तहसिन मलिक ने बताया कि आम तौर पर टिटनेस मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से पैदा होने वाले विष के कारण होता है। यह गहरे घावों में प्रवेश कर जाता है। इसका तुरंत इलाज जरूरी होता है। टिटनेस के लक्षण चार से 21 दिन में दिख सकते हैं। उन लोगों को अधिक खतरा रहता है, जिन्होंने टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लगाया हो। टिटनेस के बचने के लिए सभी को हर 10 वर्ष में बूस्टर लगवाना चाहिए। बताया कि टिटनेस के गंभीर मरीजों में से 40 प्रतिशत ही बच पाते हैं।
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