TET 2014: अभी और लंबा होगा इंतजार
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राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने भले ही साल में दो बार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित कराने की व्यवस्था की हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में दो बार की कौन कहे एक बार भी नहीं हो पा रहा है।
टीईटी-2014 कराने के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी की अभी तक कोई तैयारी नहीं है और न ही उसने शासन को कोई प्रस्ताव भेजा है।
इसलिए टीईटी पास कर शिक्षक बनने वालों को अभी और इंतजार करना होगा। यही नहीं, वर्ष 2013 में हुई टीईटी का रिजल्ट तक भी अभी जारी नहीं किया गया है।
एनसीटीई ने कक्षा 8 तक के स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर रखा है। एनसीटीई की नियमावली के मुताबिक राज्यों को प्रत्येक छह माह में टीईटी करानी होगी।
2013 के ही नहीं आए परिणाम
उत्तर प्रदेश में पहली बार वर्ष 2011 में टीईटी आयोजित कराई गई। परीक्षा परिणाम संशोधन में हुई धांधली के बाद से शिक्षा विभाग के अधिकारी डरने लगे और वह टीईटी कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। यही कारण है कि साल में एक बार होने वाली टीईटी का कभी कोई समय नहीं रहा।
वर्ष 2013 में जून में यह परीक्षा आयोजित कराई गई और अभी तक इसका रिजल्ट नहीं आ सका। इस बार सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने तो अभी तक प्रस्ताव ही नहीं भेजा है।
इस संबंध में सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार कहते हैं कि पहले वर्ष 2013 में आयोजित टीईटी का रिजल्ट आ जाए, इसके बाद नई टीईटी पर निर्णय किया जाएगा।
आचार संहिता में भी उलझा मामला
इस बार तो लोकसभा चुनाव के कारण टीईटी 2013 का परिणाम नहीं आ सका। बेसिक शिक्षा विभाग ने तय किया है कि चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद ही रिजल्ट जारी किया जाए।
हालांकि, कुछ अधिकारियों का मानना है कि मतदान समाप्त हो चुका है और आरक्षित वर्ग को 82 अंक पर पास करने के संबंध में चुनाव आयोग से अनुमति भी मिल चुकी है, इसलिए आचार संहिता का पेंच नहीं फंसेगा।
जून 2013 में प्रदेश के 872 परीक्षा केंद्रों पर टीईटी हुई थी, जिसमें 7,65,634 परीक्षार्थी शामिल हुए थे।
नियमानुसार टीईटी का रिजल्ट अक्तूबर 2013 तक ही जारी हो जाना चाहिए था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इसे जारी नहीं किया जा सका।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 72,825 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया का सारा दारोमदार जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) पर है।
डायट जितनी जल्द नवंबर 2011 के विज्ञापन के आधार पर आए आवेदनों का ब्यौरा उपलब्ध करा देगा, उतनी ही जल्दी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
सभी डायट प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वह एक सप्ताह के अंदर नवंबर 2011 के विज्ञापन के आधार पर आए हुए आवेदनों का ब्यौरा एकत्र करते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को उपलब्ध करा दे।
ब्यौरा मिलने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि कितनों ने अपना आवेदन पत्र वापस लिया था और कितनों के अभी जमा हैं।