लैब के निदेशक ने कथित विस्फोटक की जांच में किया गुमराह, अब गिरेगी गाज
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यूपी विधानसभा में मिले कथित विस्फोटक पदार्थ के मामले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) के निदेशक ने पुलिस और गृह विभाग की छीछालेदर करा दी। पहले तो शुरुआती जांच में ही इसके घातक विस्फोटक पदार्थ (पीईटीएन) होने की पुष्टि कर दी गई और फिर सैंपल को आगरा भेजने को लेकर अफसरों को गुमराह करते रहे।
यह तक बता डाला कि विस्फोटक पदार्थ की जांच आगरा में नहीं होती। अब गृह विभाग एफएसएल के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
जानकारी के अनुसार मीडिया में खबरें आने के बाद गृह विभाग के अधिकारियों ने मंगलवार सुबह एफएसएल के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय से सच्चाई जाननी चाही थी। उपाध्याय ने फोन पर बताया था कि उनकी ओर से कोई भी सैंपल आगरा एफएसएल नहीं भेजा गया है।
उन्होंने कहा था कि विस्फोटक पदार्थों की जांच आगरा में होती ही नहीं है। प्रमुख सचिव गृह ने इसे सही मानते हुए यह जानकारी मीडिया से साझा कर ली थी। लेकिन जब लिखा-पढ़ी में डॉकेट नंबर और एफएसएल आगरा को सैंपल भेजे जाने का सुबूत सामने आया तो एफएसएल के निदेशक ने अपनी गलती मान ली।
हालांकि सरकार या प्रशासन की ओर से उनके खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस अधिकारी इस बारे में अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। उन्हें लिखा-पढ़ी में जानकारी होने पर ही बयान देने को कहा गया है।
निदेशक पर हो रही है कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि एफएसएल के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। एफएसएल से जुड़े पुराने मामलों की फाइलें फिर से खंगाली जा रही हैं। तकनीकी सेवा के महानिदेशक महेंद्र मोदी से एफएसएल के संबंध में आई शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा तलब किया गया है।
वहीं पीईटीएन मामले में एटीएस या एनआई की ओर से कराई जाने वाली जांच की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही उपाध्याय पर कार्रवाई की जाएगी।
एफएसएल पर सैंपल बदलने तक का लगता रहा है आरोप
लखनऊ के महानगर स्थित एफएसएल के निदेशक और यहां होने वाली जांच पर पहले से आरोप लगता रहा है।
पूर्व डीजी तकनीकी सेवा सुब्रत त्रिपाठी बताते हैं कि 2012 से 2013 के बीच इस पद पर उनकी तैनाती के दौरान 80 से अधिक ऐसी गंभीर शिकायतें सामने आईं जिनमें एफएसएल पर जांच रिपोर्ट ही नहीं, पूरा सैंपल ही बदलने का आरोप लगा। कुछ मामले तो ऐसे थे जिनमें घटनास्थल से लाइसेंसी असलहे बरामद हुए और फोरेंसिक लैब ने असलहे को ही बदलकर रिपोर्ट दे दी।
अफीम को बता दिया था नॉर्मल पाउडर
सुब्रत त्रिपाठी की मानें तो नारकोटिक्स के मामलों में सैंपल बदले जाने की कई शिकायतें आई थीं, जिनमें अफीम को नॉर्मल पाउडर बता दिया गया था। जब जांच शुरू हुई तो एफएसएल के अधिकारी बेचैन हो गए।
जिस दिशा में जांच आगे बढ़ रही थी, उससे कई सुपर क्लास वन अफसरों का फंसना तय लग रहा था। त्रिपाठी कहते हैं कि इसी बीच अचानक उनका तबादला कर दिया गया। उसके बाद जांच का क्या हुआ, पता नहीं।
...और टलती रही जांच
सूत्रों का कहना है कि सुब्रत त्रिपाठी के जाने के बाद इस मामले की जांच तकनीकी सेवा के एडीजी राजकुमार विश्वकर्मा को दी गई जिन्होंने काम अधिक होने का हवाला देते हुए जांच नहीं की।
फिर यह जांच तत्कालीन डीजी ट्रेनिंग सुलखान सिंह को दी गई। किन्हीं वजहों से उन्होंने भी जांच करने से मना कर दिया। अब इस मामले की जांच डीजी होमगार्ड डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला को दी गई है।
लखनऊ एफएसएल : 10 हजार से अधिक सैंपल जांच की कतार में
प्रदेश के 18 में से 9 रेंज और जीआरपी व सीबीसीआईडी के मामलों में नमूने फोरेंसिक जांच के लिए लखनऊ आते हैं। विस्फोटक पदार्थ से जुड़े मामलों को आगरा भेज दिया जाता है। सूत्रों का कहना है लखनऊ स्थित फोरेंसिक लैब में 2015 से लेकर अब तक के 10 हजार से अधिक नमूने रखे हुए हैं, जिनकी जांच होनी अभी बाकी है।
इनमें सबसे अधिक डीएनए के 4100 से अधिक नमूने हैं। दूसरे नंबर पर खून के धब्बे की जांच (सीरोलॉजी) के 1400 से अधिक सैंपल हैं। बैलेस्टिक के 1200 और टॉक्सिकोलॉजी के 750 से अधिक मामले लंबित हैं। अन्य नमूने डॉक्यूमेंट डिवीजन, बायोलॉजी डिवीजन, इंस्ट्रूमेंटल एनालिसिस और मेडिको लीगल के हैं।
जांच रिपोर्ट से उठता जा रहा भरोसा
हाल ही लखनऊ में आईएएस अफसर अनुराग तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद डॉक्टरों ने विसरा सुरक्षित कर लिया था। उसे जांच के लिए एफएसएल महानगर भेजा था, लेकिन अनुराग के परिवारीजनों ने लखनऊ की लैब पर भरोसा न करते हुए बाहर की किसी लैब से जांच कराने को कहा था। इसके बाद विसरा का सैंपल चंडीगढ़ भेज दिया गया था।
इसी तरह डिप्टी सीएमओ एके सचान की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद जब सीबीआई ने फोरेंसिक एक्सपर्ट से पूछताछ की थी तो पता चला था कि फोरेंसिक एक्सपर्ट ने दूर से बैठकर ही डॉ. सचान के शरीर पर आई चोटों का मुआयना किया था और अंदाजे से ही चोट की गहराई लिख दी थी।